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रंग-गुलाल से सराबोर होकर गणपति को दी विदाई

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सूर्या मंदिर के सामने पश्चिमी यमुना नहर में गणपति जी का विसर्जन करते श्रद्धालु। संवाद
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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। रविवार को पूरा दिन गणपति बप्पा के नाम रहा। अलग-अलग स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गणपति को लेकर पश्चिमी यमुना नहर पर पहुंचे और गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ के जयघोष के बीच विसर्जन कर विघ्नविनाशक को विदाई दी।
यूं तो जिलेभर में गणेश पंडालों पर सुबह से गणपति बप्पा की धूम रही। सुबह से ही अलग-अलग स्थानों से रंग और गुलाल के बीच गणपति यात्राएं शुरू हुईं और जयकारों के साथ दोपहर बाद गणपति विसर्जन के लिए पश्चिमी यमुना नहर पर पहुंची। यहां का माहौल गणपतिमय हो गया। बड़ी संख्या में यहां श्रद्धालु गणपति को विदाई देने पहुंचे।
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छठ पर्व सेवा समिति मंडल (सूर्य मंदिर) के तत्वावधान में भी बड़ी संख्या में लोगों ने गणपति का विजर्सन किया और प्रसाद का वितरण किया। सूर्य मंदिर के सेवादारों ने यहां व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया। सूर्य मंदिर के प्रधान सुरेश कुमार यादव ने कहा कि गणेश विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन करने का विधान है। भाद्र शुक्ल चतुर्थी से गणेश पूजन आरंभ करके चतुर्दशी को गणपति के विसर्जन का विधान शास्त्रों में बताया गया है। श्रीगणेश शुभ और लाभ प्रदान करने वाले देवता हैं, मंगलमूर्ति और विनायक हैं। विनायक की विदाई बहुत ही आनंदपूर्वक और शुभ विधि विधान से करने की परंपरा रही है। मौके पर अर्जुन, उमेश चौहान, राम विलास, मुंशी, शत्रुघन, सोगारथ, घनश्याम, दिवाकर आदि कई प्रमुख लोग शामिल रहे।
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