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सड़क को मॉडल बनाना तो दूर सात माह बाद चयन तक नहीं

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अपने कामों को लेकर अधिकारी कितने चिंतित रहते हैं, इसका उदाहरण शुक्रवार को लघु सचिवालय में हुई रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक में देखने को मिला। सड़क से जुड़े हर विभाग नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, मार्केटिंग बोर्ड, एचएसवीपी व सभी नगर पालिकाओं को अपने क्षेत्र की एक सड़क को मॉडल बनाना था। जनवरी में हुई बैठक में डीसी निशांत कुमार यादव ने इसके निर्देश दिए थे, जिसे मार्च माह तक पूरा करके रिपोर्ट देना था, लेकिन निर्देशों के सात माह बीत जाने के बाद भी तरावड़ी नगर पालिका अभी तक सड़क का चयन ही नहीं कर पाई कि किसे मॉडल बनाया जाए? काम शुरू होना तो दूर की बात है। शुक्रवार को हुई बैठक में पहुंचे तरावड़ी नगर पालिका के एमई से जब डीसी ने इस बारे सवाल किए, तो वे जवाब नहीं दे पाए। उनके अधूरे जवाबों से असंतुष्ट होकर डीसी ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
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बैठक में करनाल के एसडीएम आयुष सिन्हा, एसडीएम असंध साहिल गुप्ता, एसडीएम इंद्री सुमित सिहाग, एसडीएम घरौंडा डॉ. पूजा भारती व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
यह सड़कें बनेंगी मॉडल, विभागों ने दिये जवाब-
-पीडब्ल्यूडी : पश्चिमी यमुना बाईपास पर 6.3 किलोमीटर सड़क को मॉडल रोड बनाने का काम जारी है।
-एचएसवीपी : सेक्टर-4 और 5 की डिवाइडिंग रोड को मॉडल बनाने पर काम चल रहा है।
-मार्केटिंग बोर्ड : पधाना से गांगर रोड को मॉडल बना रहे हैं।
-नगर पालिका नीलोखेड़ी : पुलिस पोस्ट से बटालियां चौक तक
-नगर पालिका असंध : सफीदो रोड से मलिकपुर रोड तक
-नगर पालिका इंद्री : शहीद उधम सिंह चौक से गीता मंदिर रोड तक
-नगर पालिका निसिंग : गुरुद्वारा रोड़ी साहिब से नगर पालिका निसिंग सीमा तक
यह है मॉडल रोड प्रोजेक्ट-
1. गड्ढामुक्त होने के अलावा सेफ्टी का भी रखा जाएगा ध्यान
मॉडल सड़कें जहां पूरी तरह से गड्ढा मुक्त होंगी। वहीं, इन पर सड़क सुरक्षा संबंधित हर बिंदु का ध्यान रखा जाएगा। पूर्व रोड सेफ्टी एसोसिएट सचिन के अनुसार, मॉडल सड़कों पर हर जरूरी संकेतक, लाइट, रिफ्लेटर, रोड मार्किंग व स्पीड ब्रेकर होंगे। साथ ही जहां जरूरत होगी, वहां पर ट्रैफिक लाइटें भी लगाई जाएंगी।
2. खराब सड़कों का होगा चयन, ..ताकि हादसा मुक्त हो करनाल
डीसी निशांत कुमार यादव का कहना है कि मॉडल सड़क के लिए उन्हीं सड़कों को चुना जा रहा है, जिनकी वर्तमान में हालत खराब है या फिर ज्यादा लोगों की उस रोड पर आवाजाही है। रोड इंजीनियरिंग से जुड़े हर विभाग को एक-एक सड़क तैयार करने को कहा गया है। इसके पीछे का उद्देश्य करनाल की सड़कों को हादसा मुक्त करने के अलावा सुरक्षित बनाना भी है।
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