खरीद एजेंसियों से अधिक आढ़तियों को यूपी वाले गेहूं का इंतजार है, क्योंकि अभी तक जिले की कई मंडियां पिछले की अपेक्षा पचास फीसदी भी गेहूं नहीं खरीद सकी हैं। अनाज मंडी करनाल में कई ऐसे आढ़ती हैं, जिन्होंने इस साल एक किलो गेहूं की भी खरीद नहीं की है, उन्हें यूपी वाले गेहूं का बेसब्री से इंतजार है। जिसे हरियाणा सरकार ने अपनी सीमा में प्रवेश ही नहीं करने दिया। लेकिन अब ऐसे किसान जो हरियाणा के विभिन्न जिलों के निवासी हैं लेकिन उनकी खेती यूपी और अन्य राज्यों में हैं, को हरियाणा राज्य की सीमा में अपना गेहूं लेकर आने की छूट मिलने वाली है। इसके लिए हरियाणा सरकार की ओर से शुक्रवार को ई-पोर्टल मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पर यूपी से गेंहू लाने के लिए पंजीकरण शुरू किया गया, लेकिन यह पोर्टल सिर्फ तीन घंटे चलने के बाद ही फिर से बंद हो गया। अब यह पोर्टल 17 मई को खुलेगा।
करनाल अनाज मंडी के आढ़तियों का कहना है कि करनाल जिले में हरियाणा से अधिक यूपी के किसानों का गेहूं विक्रय के लिए आता था। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि हरियाणा राज्य में जीटी रोड पर आने वाले विभिन्न जिलों की अनाज मंडियों में 20 से 60 फीसदी गेहूं उत्तर प्रदेश से ही आता था। लेकिन इस साल लॉकडाउन के बीच शुरू हुई गेहूं की खरीद में यूपी और अन्य पड़ोसी राज्यों से गेहूं लाने पर हरियाणा सरकार ने पूर्ण रूप से पाबंदी लगा दी। इसका खामियाजा हजारों किसानों को भुगतना पड़ा। ऐसे किसान जो करनाल जिले के रहने वाले हैं, उन्होंने यूपी में जाकर गेहूं उत्पादित किया। उनका पंजीकरण ना तो करनाल में हो सका और ना ही यूपी के किसी जिले में, क्योंकि उनका आधार कार्ड हरियाणा राज्य का। इन किसानों का लाखों क्विंटल गेहूं अभी नहीं बिक सका है। यह किसान रोज ही अनाज मंडियों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अब इनकी आस पूरी होने वाली है, क्योंकि हरियाणा सरकार यूपी के गेहूं किसानों के लिए अपनी सीमाएं खोलने वाली है। अनाज मंडी में आढ़तियों ने बताया कि शुक्रवार की सुबह को उत्तर प्रदेश के गेहूं किसानों के पंजीकरण के लिए मेरी फसल-मेरा ब्यौरा ई-पोर्टल खोला गया था। इसकी जानकारी उत्तर प्रदेश के किसानों तक भी पहुंची। तेजी के साथ पंजीकरण शुरू हुआ लेकिन तीन घंटे बाद ही पोर्टल को बंद कर दिया गया। उस पोर्टल पर लिखकर आने लगा कि यह पोर्टल अब 17 मई को खुलेगा। कुल मिलाकर किसानों को अभी 17 मई यानी लॉकडाउन 3.0 के अंतिम दिन का इंतजार करना होगा। विदित हो कि पोर्टल पर ऐसी कोई शर्त नहीं है कि किसान हरियाणा राज्य का ही होना चाहिए और गेहूं यूपी का, बल्कि इस पोर्टल पर उत्तर प्रदेश का कोई भी किसान जो अपने गेहूं को हरियाणा राज्य में लाकर बेचना चाहता है, वह अपना पंजीकरण करा सकता है।
उत्तर प्रदेश के किसानों के गेहूं को करनाल (हरियाणा) की मंडी में बेचने के लिए पंजीकरण कराना होगा। शुक्रवार को ई-पोर्टल खुला था, रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो गया था, लेकिन तीन घंटे बाद ही पोर्टल बंद हो गया। इस पर लिखकर आया कि पोर्टल अब 17 मई को खुलेगा। इसके बाद ही किसान रजिस्ट्रेशन करा पाएंगे, तभी यूपी का गेहूं हरियाणा राज्य में प्रवेश कर सकेगा। इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के दौरान ऐसी कोई शर्त नहीं है कि किसान हरियाणा राज्य का ही होना चाहिए।
-सुरेंद्र सिंह कांबोज, सचिव अनाज मंडी करनाल।
शुक्रवार को ई-पोर्टल मेरी फसल-मेरा ब्यौरा खुला और यूपी के गेहूं की खरीद के लिए किसानों का पंजीकरण शुरू हुआ तो उम्मीदें बंधी। लेकिन कुछ देर ही पोर्टल फिर से बंद हो गया। पोर्टल पर लिख दिया गया कि 17 मई को खुलेगा। अनाज मंडी में बड़ी संख्या में ऐसे आढ़ती है, जिनके यूपी के किसानों से सीधे संबंध है, वह यूपी से आने वाले गेहूं की खरीद पर ही निर्भर हैं। पोर्टल को शीघ्र शुरू करके गेहूं को हरियाणा राज्य में आने की इजाजत देनी चाहिए।