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किसान महापंचायत: आरपार के मूड में दिखे अन्नदाता, शांतिपूर्वक आंदोलन की खाई कसमें

Wed, 08 Sep 2021 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा)

सार

एक ओर जहां किसानों में आक्रोश था, वहीं मोर्चा के नेताओं ने किसानों को शांतिपूर्वक आंदोलन करने और अनुशासन में रहने की कसम दिलाई। उन्होंने कहा कि जोश व होश के साथ संयम से ही जीत संभव है। पुलिस यदि लठ मारे तो कोई प्रतिक्रिया नहीं करनी है। दूसरी ओर युवा किसान टकराव के मूड में नजर आए।
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करनाल में किसानों का प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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28 अगस्त को बसताड़ा टोल प्लाजा पर हुए लाठीचार्ज से खफा किसान मंगलवार को आरपार के मूड में दिखाई दिए। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली सहित अन्य राज्यों के किसान करनाल की नई अनाज मंडी में महापंचायत में पहुंचे। एक ओर जहां किसानों में आक्रोश था, वहीं मोर्चा के नेताओं ने किसानों को शांतिपूर्वक आंदोलन करने और अनुशासन में रहने की कसम दिलाई। उन्होंने कहा कि जोश व होश के साथ संयम से ही जीत संभव है। पुलिस यदि लठ मारे तो कोई प्रतिक्रिया नहीं करनी है। दूसरी ओर युवा किसान टकराव के मूड में नजर आए।

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अनाज मंडी में भाकियू राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, भाकियू प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी, संयुक्त किसान मोर्चा से योगेंद्र यादव, जोगिंद्र सिंह उगराहां, गुरमुख सिंह, शिवकुमार कट्टा, अभिमन्यु कुहाड़, बलदेव सिंह सिरसा, बलबीर सिंह राजेवाल, डा. दर्शनपाल, बलबीर सिंह दल्लेवाल, मंजीत राय व संयुक्त किसान मोर्चा के अन्य नेता मंच पर पहुंचे। प्रशासन से बातचीत के लिए 15 सदस्यीय कमेटी लघु सचिवालय पहुंची। प्रशासन से चली तीन दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद शीर्ष नेताओं ने मंडी स्थित एक दुकान में अलग से बैठकर आगामी निर्णय लिया।


बलबीर सिंह ने मंच से शाम 4.31 बजे कमेटी का निर्णय सुनाया और पैदल पांच किलोमीटर चलकर जिला सचिवालय का घेराव करने का एलान किया। इससे पहले किसान नेताओं का अंतिम निर्णय सुनने के लिए युवाओं की भीड़ उतावली थी। किसान नारेबाजी करते हुए महापंचायत स्थल से चले तो भारी भीड़ के आगे पुलिस को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। राष्ट्रीय राजमार्ग से होते हुए किसान शाम 6.09 बजे निर्मल कुटिया चौक पर पहुंच गए और बैरिकेड तोड़कर सचिवालय के प्रवेश द्वार तक पहुंचे, हालांकि यहां किसानों को करीब दस मिनट तक वाटर कैनन की बौछारों का सामना करना पड़ा लेकिन किसानों ने यहीं सड़क के बीच डेरा डाल दिया। इसके बाद राकेश टिकैत व गुरनाम सिंह चढूनी सहित सभी किसान नेता सड़क के बीच बैठकर आगामी रणनीति पर बातचीत करते रहे। किसानों ने प्रशासन से लाठीचार्ज मामले में इंसाफ करने की मांग की।
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पुलिस ने जो किया, किसान वैसा नहीं करेंगे : यादव
अनाज मंडी में आयोजित किसान महापंचायत में संयुक्त किसान मोर्चा के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि शहीद किसान सुशील की सौगंध लेकर किसान आज यहां आए हैं। ये पूछने आए हैं कि कौन से कानून के तहत एक आईएएस अधिकारी जनता का सिर फोड़ने की बात कहता है। पुलिस ने हमारे साथ जैसा बर्ताव किया, किसान वैसा नहीं करेंगे। हम अपनी ताकत दिखाएंगे। न्याय की आवाज उठाएंगे। शांति हमारी ताकत है।

सर कटा देंगे मगर झुकाएंगे नहीं : कोथ
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता अभिमन्यु कोथ ने कहा कि ये किसान जंग के मैदान में लड़ते हुए कुर्बानी देने वालों के वंशज हैं। ये अपने सिर कटा देंगे लेकिन सरकार के सामने नहीं झुकेंगे। किसानों को सचिवालय के घेराव करने से रोकने के लिए जितनी फोर्स लगा रखी है, वह सब एक घंटे में हट जाएगी। जब किसान एकजुट होता है तो बड़े-बड़े तानाशाहों को भी पीछे हटना पड़ता है। सत्ता में तानाशाह लोग बैठे हैं।

किसान करेंगे लोकतंत्र बहाल : राय
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता मंजीत राय ने किसानों से कहा कि एकता का परिचय दें। सरकार कहती है कि आंदोलन नहीं है लेकिन सरकार आंखें खोलकर देखे। यदि लोकतंत्र बहाल करना है तो किसान करेगा।

सरकार चाहती है मोर्चा टूटे : मंजीत
मंजीत नत्थूवाल ने कहा कि किसान अपनी लड़ाई जीतने जा रहे हैं। बेशक जितनी मर्जी लाठियां-गोलियां चला लें लेकिन किसान न्याय लेकर ही रहेंगे। सरकार चाहती है किसान मोर्चा टूट जाए। वह भड़काना चाहती है। ऐसे लोगों की बात नहीं माननी। शांतिपूर्वक आंदोलन से सिंघु बॉर्डर पर किसानों के हौसले बढ़े हैं। सरकार हारने जा रही है।

देश का राजनीतिक आधार बदलेगा आंदोलन : प्रसाद
अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एवं केरल से पूर्व विधायक पी. कृष्णा प्रसाद ने कहा कि यह आंदोलन देश का राजनीतिक आधार बदलेगा। मेहनतकश वर्ग का मुद्दा है। सभी राजनीतिक दलों के लिए ये चुनौती भी है कि वे किसान के साथ हैं या विरोध में। 75 साल से देश में किसान विरोधी नीतियां बन रही हैं। खेती के बिना देश बच नहीं सकता। किसान अब प्रवासी मजदूर बनता जा रहा है। किसानों के खेत व पशु उनके पास नहीं रहे। वे मजदूर बनने को मजबूर हुए। ऐसी परिस्थिति ब्रिटिश राज में भी आई थी, जब लाठीचार्ज से मौत होती थी। किसान अहिंसा के साथ चल रहे हैं यही आंदोलन की खूबी है।

आंदोलन से लिखा जाएगा नया अध्याय : राजेवाल
बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि पूरी दुनिया में कभी ऐसा आंदोलन नहीं हुआ। इस आंदोलन ने दुनिया का ध्यान खींचा है। किसान कसम खाए कि जोश में कोई गलत काम न करे जिसकी सजा सबसे बड़े आंदोलन को मिले। हरियाणा राज्य का इस आंदोलन में अहम स्थान है। आज हरियाणा नया अध्याय लिख रहा है। शांतिमय रहोगे तो जीत होगी यदि जोश में होश खोकर हिंसक हो गए तो हार जाओगे। सत्याग्रही को शारीरिक कष्ट सहना पड़ता है। जोश व होश के सामंजस्य के साथ आगे बढ़ें तो कोई ताकत हरा नहीं सकती।

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