माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। शहर और आसपास के इलाकों में तेजी से फैल रही अवैध कॉलोनियों में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। हालात ये हैं कि इन कॉलोनियों में पहले बिजली के खंभे और तार लग जाते हैं जबकि सड़कें बाद में बनाई जाती हैं। कॉलोनियों को न तो डीटीपी विभाग से मंजूरी मिली है और न ही बुनियादी सुविधाओं के लिए किसी अन्य विभाग से स्वीकृति। फिर भी विकास कार्य होने पर विभागों पर मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं।
शहर के बाहरी क्षेत्रों में दर्जनों अवैध कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। कॉलोनी डेवलपर बिना किसी वैधानिक अनुमति के न केवल प्लॉट काट रहे हैं, बल्कि सीवर-पानी की व्यवस्था भी अपने स्तर पर कर रहे हैं। हैरानी की बात तो ये है कि कई बार सड़कें सरकारी खर्च पर भी बना दी जाती हैं। बिजली निगम की ओर से इन कॉलोनियों में खंभे खड़े कर तार बिछा दिए जाते हैं।
शहरवासियों का कहना है कि कॉलोनी काटने वाले कॉलोनाइजर पहले बिजली की लाइनें डलवाकर ग्राहकों को यह भरोसा दिलाते हैं कि कॉलोनी वैध है और सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। कई जगहों पर तो अभी तक सड़कें तक नहीं बनीं, लेकिन बिजली के खंभे और मीटर पहले से लगे हुए हैं। इससे स्पष्ट है कि संबंधित विभागों की मिलीभगत से अवैध कॉलोनियों का विकास हो रहा है।
डीटीपी के सर्वे के अनुसार जिले में करीब 58 अवैध कॉलोनियां हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार स्थानीय स्तर पर दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण बिजली के खंभे पहले लगा दिए जाते हैं। इसके बाद कॉलोनी में पक्की सड़कें और नालियां बनाई जाती हैं, जिससे यह दिखाया जा सके कि कॉलोनी पूरी तरह से व्यवस्थित हैं।
जिला योजनाकार की अनुमति के बिना बिजली निगम कहीं भी खंभे नहीं लगाता। कॉलोनाइजर खुद ही खंभे लगा लेते हैं। ये खंभे प्राइवेट लोगों के माध्यम से आसानी से उपलब्ध भी हो जाते हैं। -नसीब सिंह, अधीक्षण अभियंता, बिजली निगम करनाल