संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। शहर की पार्श्वनाथ सिटी में इन दिनों बिजली संकट गहराया हुआ है। एक सप्ताह से यहां पर बिजली की इतनी किल्लत है कि यहां के बाशिंदे करीब 150 परिवारों को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है। इसकी शिकायत लेकर पीड़ित उपायुक्त के निवास स्थान पर पहुंचे।
यहां सुबह छह बजे ही बत्ती गुल हो जाती है और रात को 11 बजे बिजली आती है। इस कारण लोग अपना रोजमर्रा का काम भी नहीं कर पाते। पीड़ितों का कहना है कि इस बारे में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने भी उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था, उस पर भी जिला प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं लोगों का कहना है कि इस कॉलोनी का सरकार की ओर से लाइसेंस होने, सुविधा होने के कारण लोगों ने यहां प्लाट खरीदकर मकान बनाए थे। अब सिटी का करीब 36 लाख बिल बकाया होने के कारण यहां का बिजली कनेक्शन काटा गया है। उनका कहना है कि लोगों से सुविधा शुल्क के नाम पर सभी तरह के शुल्क लिए जा रहे है।
बावजूद इसके यहां के बाशिंदों को कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। पीड़ितों का कहना है कि यहां करीब 600 लोग रहते है, सरकार को चाहिए की सभी परिवारों को उनका स्वयं का एकल स्वामित्व वाला बिजली कनेक्शन दिया जाए। वह 2019 से इस सिटी में रह रहे है, लगातार पांच साल से बिजली व पानी की समस्या यहां अक्सर रहती है। इस बारे में बिजली निगम के उच्च अधिकारियों व जिला प्रशासन के मौजूदा अधिकारियों को भी अवगत करवाया गया है लेकिन उन्हें आश्वासन के अलावा उनकी समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं किया जा रहा है।
लोगों का कहना है कि यदि उनकी शिकायत का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वह बिजली मंत्री अनिल विज को इसकी शिकायत करेंगे। इस मौके पर लोगों का कहना है कि सरकार झुग्गी झोपड़ियों में भी कनेक्शन दे रही है लेकिन वैध कॉलोनियों में भी कनेक्शन नहीं दिए जा रहे है। बिजली की समस्या के चलते लोग रोजमर्रा के काम भी नहीं कर पा रहे है।
बिजली के न होने से कॉलोनी के सभी घरों में पानी किल्लत है। इस कारण से रोजाना ऑफिस जाने, घरेलू कार्यों व बच्चों व बुजुर्गों को सबसे ज्यादा समस्या आ रही है। नौकरीपेशा व व्यापारी आदमी भी अपने काम पर फोकस नहीं कर पा रहे है। लोगों का कहना है कि यदि सिटी डेवलपर व बिल्डर बिल नहीं भर रहे है तो उनका कनेक्शन काटा जाए।
उनकी संपत्ति कुर्क की जाए, इसका खामियाजा सुविधा शुल्क देने वाले लोग क्यों भुगते। उनका कहना है कि 150 परिवारों का कोई मासिक शुल्क बकाया नहीं है फिर भी उनको कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। लोगों ने यहां प्लांट सरकार का लाइसेंस देखते हुए लिए थे। आज यहां के डेवलपर के हौसले इतने बुलंद है कि वह जिला प्रशासन के किसी भी बड़े अधिकारी का फोन तक नहीं उठाते।