संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले में प्राथमिक स्तर की शिक्षा की वास्तविक स्थिति जानने के लिए मार्च के दूसरे सप्ताह में एफएलएस (फाउंडेशन साक्षरता अध्ययन) कराया जाएगा। कक्षा तीन तक के बच्चों की पढ़ने, लिखने और गणित की बुनियादी दक्षता की जांच की जाएगी। चयनित विद्यालयों के परिणामों के आधार पर पूरे जिले की शिक्षा गुणवत्ता का आकलन होगा। उसी रिपोर्ट के अनुसार आगे नई शैक्षणिक योजनाएं और सुधार कार्यक्रम लागू किए जाएंगे।
इससे पहले ऐसा अध्ययन वर्ष 2022 में हुआ था। केंद्र स्तर से जिले के सभी 483 राजकीय प्राथमिक विद्यालयों का विस्तृत ब्योरा मांगा गया है। कौन सा विद्यालय चुना जाएगा, यह पहले से तय नहीं होगा। टीम सीधे विद्यालय में पहुंचकर बच्चों का सरल परीक्षण करेगी, ताकि शिक्षा की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। जिन विद्यालयों का चयन होगा, उन्हीं के परिणामों के आधार पर पूरे जिले की शिक्षा की स्थिति का आकलन किया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों को बच्चों की बुनियादी पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। विद्यालयों से नियमित पठन-अभ्यास, लेखन-अभ्यास और सरल गणित गतिविधियां करवाने को कहा गया है।
- रटने नहीं, समझने की क्षमता पर रहेगा जोर
इस अध्ययन में बच्चों की कठिन परीक्षा नहीं ली जाएगी। उनसे सरल गतिविधियों के माध्यम से यह देखा जाएगा कि बच्चा पुस्तक का छोटा पाठ पढ़ सकता है या नहीं, पढ़कर उसका अर्थ समझता है या नहीं, सही ढंग से लिख पाता है या नहीं, जोड़-घटाव जैसे सामान्य प्रश्न हल कर पाता है या नहीं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक कक्षाओं में ही पढ़ना-लिखना और गणना की मजबूत नींव पड़ती है। यदि यह आधार मजबूत हो, तो आगे की पढ़ाई अपने आप आसान हो जाती है।
वर्जन :
बुनियादी पढ़ाई मजबूत होगी तो आगे की शिक्षा अपने आप बेहतर होगी। आकलन मार्च के दूसरे सप्ताह में किया जाएगा। यह अध्ययन बच्चों की वास्तविक सीख को समझने का माध्यम बनेगा। सभी विद्यालयों की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। - अंशुल, एफएलएन अधिकारी