करनाल। ईद उल जुहा की नमाज रविवार की सुबह रिमझिम फुहारों के बीच शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में ईदगाह और अन्य मस्जिदों में पढ़ी गई। इसमें कौम और मुल्क की एकता और अखंडता के लिए दुआएं की गईं।
हजरत मौलाना तसव्वुर ने नूरानी मस्जिद रेलवे-स्टेशन मस्जिद पर ईद उल जुहा की नमाज पढ़ाई। इस दौरान उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को चाहिए कि जहां भी कुर्बानी करें, वहां इस बात का ख्याल रखें कि कहीं भी कुर्बानी के बाद उसके अवशेषों को रास्ते में न फेंकें। उन्होंने कहा कि हमें अपने अंदर की बुराइयों को खत्म करने का प्रयास करना चाहिए। हम सब भारतीय हैं, हमें अपने देश की तरक्की के लिए काम करना चाहिए।
ईदगाह में ईद उल जुहा की नमाज मौलाना अहमद साहब ने पढ़ाई। बाद नमाजे ईद उल जुहा उन्होंने कौम को खिताब करते हुए कहा कि इस ईद पर कुर्बानी की जाती है। कुर्बानी करने वाले अपने रब को खुश करने के लिए कुर्बानी करते हैं। हम सब का कर्तव्य होता है कि हम सरकार के द्वारा जिस जानवरों की कुर्बानी की इजाजत दी गई है, उन्हीं जानवर की कुर्बानी करें।
उन्होंने कहा कि कुर्बानी पर्दे के पीछे होनी चाहिए। खुले में कुर्बानी नहीं करनी है। कुर्बानी के अवशेष व खून को जंगल में लेकर जाएं और वहां दबा दें। जहां कुर्बानी की जाती हैं, वहां पर जो खून पड़ा होता है, उसको पानी से साफ कर के बहा देना चाहिए। इसके बाद मौलाना अहमद साहब ने ही दुआ करवाई। दुआओं में अमनो अमन के साथ प्रदेश और देश के लिए भी एकता अखंडता की दुआ मांगी गई।
जामा मस्जिद में अल्हाज हाजी मौलाना नदीम साहब ने नमाज अदा कराई। देवी लाल चौक के निकट नगीना मस्जिद में मौलाना मुर्सलीन साहब ने नमाज पढ़ाई। कसूरी वाली मस्जिद में वकीलुर्रहमान साहब ने नमाज पढ़ाई। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रवक्ता खुर्शीद आलम ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जब से यह नारा दिया है कि हरियाणा एक हरियाणवी एक, तब से सभी धर्मों में आपसी विश्वास भाईचारे को बढ़ावा मिला है। उन्होंने मस्जिदों में जाकर कुर्बानी को पर्दे में ही करने की अपील की। बकरे के अलावा किसी भी बड़े जानवर की कुर्बानी मुस्लिमों के गांव में ही जा कर करें। शहर के साथ साथ जिलेभर के विभिन्न गांवों में ईद उल जुहा को परंपरागत तरीके से मनाया गया। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी।