सीएम सिटी बनने के बाद सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और बच्चों को आस थी कि सरकारी स्कूल व जिला शिक्षा विभाग में जरूर सुधार होगा, लेकिन स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। हाल यह है कि इस समय जिले में करीब 1800 शिक्षकों की कमी है। इसके अतिरिक्त कंप्यूटर टीचर भी ढूंढने से भी नहीं मिलते। ऐसे में सरकारी स्कूलों के बच्चों को न पारंपरिक शिक्षा मिल पा रही है न ही आधुनिक।
एक ओर 1800 शिक्षकों का टोटा तो दूसरी तरफ करोड़ों रुपये की लागत से लगाए गए एजुसेट सिस्टम ठप पड़े है। एजुसेट सिस्टम के साथ-साथ सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर लैब के भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। कहीं एजुसेट सिस्टम चोरी हो गए हैं तो कहीं एजुसेट सिस्टम से जुड़े अन्य पार्ट। लंबे अरसे से जिलेभर में सरकारी स्कूलों की कुछ ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। बहरहाल जिले में सरकारी स्कूल दम तोड़ते दिखाई दे रहे हैं। गांव में स्थिति यह है कि यहां लाखों रुपये की लागत से जनरेटर को मुहैया कर दिया गया, लेकिन करीब 2 सालों से यह खराब पड़ा है।
4 को प्रधानमंत्री करेंगे बच्चों से मन की बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साल बाद फिर से 4 सितंबर को देशभर के स्कूली बच्चों से गत सितंबर माह की भांति मन की बात करेंगे। ऐसे में सवाल यह है कि यहां कंप्यूटर सिस्टम से लेकर डीटीएच और एजुसेट सिस्टम ठप होने से प्रधानमंत्री को कैसे बच्चे सुन पाएंगे? केवल प्रधानमंत्री या मंत्रियों के भाषण के दौरान ही शिक्षा विभाग को इन उपकरणों की याद आती है। सभी डीटीएच और एजुसेट सीधे लाइट पर ही आधारित हैं, लाइट होंगे तो ही चलेंगे। इनवर्टर या जनरेटर से इनका कोई संबंध नहीं है।
1 लाख रुपये की लागत से लगा है एक सिस्टम
जिले में कुल 786 सरकारी स्कूल हैं। इनमें से 2006 से पहले बने 68 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में डीटीएच सिस्टम लगे हुए हैं। शेष में एजुसेट है। प्राथमिक स्कूलों में 1 लाख रुपये की लागत से एजुसेट सिस्टम लगवाए गए थे। जबकि सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में करीब 1 लाख 30 हजार रुपये की लागत से।
590 एजुसेट सिस्टम में से 400 ठप
जिले में इस समय हाल यह हैं कि इस समय जिले में 590 एजुसेट सिस्टम हैं। इनमें से करीब 400 स्कूलों में विभिन्न कारणों से यह ठप पड़े हैं। वर्तमान समय की बात करें तो 80 स्कूलों से इनर्वटर, बैटरी, सीपीयू इत्यादि के लिए बजट मांगा गया है, शेष 500 स्कूलों के लिए भी जल्द बजट मांगा जाएगा। लेकिन यह कब आएगा कुछ नहीं कहा जा सकता।
डायरेक्ट टू होम सर्विस भी तोड़ गई दम
करनाल जिले में छठी से लेकर 12वीं तक के तमाम स्कूल में डीटीएच प्रणाली लगी है। तो साइंस स्कूल को विशेष सुविधा देते हुए वहा एजुसेट प्रणाली लगाई गई। इस प्रणाली के तहत विशेषज्ञ शिक्षक टीवी के माध्यम से विद्यार्थियों से रू-ब-रू होते हैं, यदि किसी छात्र को कोई शंका है तो वह विशेषज्ञ से उसका हल भी जान सकते हैं, लेकिन काफी समय से यह प्रणाली पूरी तरह से ठप है। विद्यार्थियों को तो अब याद भी नहीं है कि स्कूल में एजुसेट सिस्टम के माध्यम से वह किसी से बात भी करके अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं।
गांव में आती है मात्र 2 घंटे बिजली
अमर उजाला की टीम ने जब स्कूलों का दौरा किया तो पता चला कि ज्यादातर ग्रामीण एरिया में स्थित स्कूलों में केवल 2 घंटे ही बिजली आती है। इस स्कूल में 22 कंप्यूटर हैं लेकिन कंप्यूटर सीखाने वाला शिक्षक एक भी नहीं है। गांव में एक सप्ताह सुबह 11 से 1 बजे तक लाइट आती है तो एक सप्ताह दोपहर 1 से 3 बजे तक। यहां जनरेटर तो है लेकिन पिछले 2 साल से ठप पड़ा है। इसी तरह गांव निगूद, इंद्री, असंध के दर्जनों स्कूलों की स्थिति है।
बिजली के बिना एजुसेट फेल
जिले के सरकारी स्कूलों में वैकल्पिक बिजली का प्रबंध नहीं होने की एजुसेट सिस्टम फेल हो रहे हैं। बिजली संकट के बीच वैकल्पिक बिजली का प्रबंध नहीं होने की वजह से स्कूलों में एजुसेट और डीटीएच सिस्टम नहीं चल पा रहे हैं। बैटरियां कंडम हो चुकी हैं या चोरी कर ली गई हैं। करनाल के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में गत दिनों आयोजित किए गए स्काउट कैंप के दौरान 5 जिलों के बच्चे इस स्कूल में ठहरे थे। इसी दौरान स्कूल से सीपीयू व स्पीकर चोरी कर लिया गया। बाकायदा पुलिस को एफआईआर दर्ज भी कराई गई। लेकिन आज तक न तो चोरी किया गया सामान आ पाया न ही शिक्षा विभाग ने नया सामान स्कूल को देने की जरूरत समझी। लिहाजा यहां भी यह सिस्टम ठप है।
वर्जन
हमारे स्कूल से कुछ समय पहले एजुसेट से सीपीयू व अन्य उपकरण चोरी हो गए थे। इसकी एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसीलिए एजुसेट काम नहीं कर रहा है।
-नरेंद्र विर्क, प्रिंसिपल गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, करनाल।
वर्जन
जल्द ही जिन एजुसेट का सामान खराब है या अन्य सामान की जरूरत है उसे मंगवा दिया जाएगा। 4 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम को हर हाल में सफल कराया जाएगा। लाइट के लिए बंदोबस्त कराया जाएगा।
-आशा मुंजाल, डीईओ, करनाल।