कानों में ईयर फोन, मोबाइल में सेल्फी और रील छीन रही पटरी पर जिंदगियां
- एक साल में गई 44 की जान, इसमें 21 की सिर्फ लापरवाही से तो 12 ने किया सुसाइड
- दो की हुई हत्या जबकि नौ लोगों पर टूटा कुदरत का कहर
- 2024 में 44 लोगों की हुई मौत, 2023 में 51 जबकि 2022 में 56 लोग बन चुके हैं काल का ग्रास
फोटो: 501 से 504
जितेंद्र नरवाल
करनाल।
रेलवे ट्रैक पर कानों में ईयर फोन या लीड, सेल्फी लेते मोबाइल और इनमें बनती रील जानलेवा साबित हो रही है। ऐसी लापरवाही के साथ ट्रैक पर चलते या पार करते कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं। पिछले साल वर्ष 2024 में रेल दुर्घटनाओं में 21 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 12 लोगों ने रेलवे ट्रैक पर आत्महत्या की है। इसके अलावा दो केस हत्या और नौ लोगों की जान कुदरत के कहर की वजह से गई। दुर्घटनाओं में जान गवांने वाले कई मामले ऐसे देखे गए जो ऐसी लापरवाही की वजह से हुए।
ऐसे लापरवाही के अलावा चलती ट्रेनों में उतरना और चढ़ना भी हादसों की वजह बनता है। यहां तक की रेलवे स्टेशन पर चाय, पुड़ी बेचने वाले वेंडर तक पीछे नहीं हैं। ट्रेन के थमने से पहले और स्पीड पकड़ने के बाद भी ये आसानी से ट्रेन में उतर और चढ़ जाते हैं। स्टेशन पर प्लेटफार्म बदलने के लिए ट्रैक पार करना तो आम बात हो गया है। भीड़ ज्यादा होने पर प्लेटफार्म की बजाए पटरी की ओर खड़े रहना अब ट्रेंड बनता जा रहा है। हालांकि समय समय पर जीआरपी और आरपीएफ की टीम लोगों को जागरूक करने का काम तो करती है बावजूद लोग लापरवाही से ट्रैक पार कर ही जाते हैं या रेलवे ट्रैक पर चलने लगते हैं। जो बाद में रेल हादसों की वजह से काल का ग्रास बन जाते हैं।
हालांकि रेल हादसों का ये ग्राफ पिछले सालों की तुलना में घटा तो है लेकिन अब भी लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। पिछले साल रेल ट्रैक पर हुए हादसों या रेलवे परिसर में हुई मौतों की बात करें तो 2023 में 51 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 33 की रेल दुर्घटना, छह आत्महत्या और सात कुदरत कहर से जान गवां चुके हैं। जबकि 2022 में 56 लोगों की मौत हुई। इनमें 36 की जान रेल दुर्घटनाओं में गई, 12 ने आत्महत्या की और सात लोगों की परिसर में मौत होने के मामले सामने आ चुके हैं।
ये हो चुके बड़े हादसे:
- जनवरी 2023 में घोघड़ीपुर रेलवे फाटक के पास सेल्फी लेने के चक्कर में दो युवकों की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। दोनों ईयर फोन लगाकर सेल्फी ले रहे थे। उन्हें ट्रेन की आवाज सुनाई नहीं दी। मृतकों की उम्र 18-18 साल थी।
- अप्रैल 2019 में दिल्ली अंबाला रेलमार्ग पर करनाल और पानीपत के बीच बाबरपुर स्टेशन के पास सेल्फी लेने के चक्कर में तीन युवकों ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। तीनों युवक 18 से 20 वर्ष के बीच की आयु के रहे होंगे।
- जून 2024 में ऐसे ही करनाल के बजीदा स्टेशन पर मोबाइल में व्यस्त एक आदमी की रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
- फरवरी 2024 में फोन पर बात करते हुए रेलवे ट्रैक पार करने वाली महिला कांस्टेबल तक ट्रेन दुर्घटना की वजह से अपनी जान गवां चुकी हैं।
- सितंबर 2023 में गांधी नगर फाटक के पास कानों में लीड लगाकर रेलवे ट्रैक पार करते समय एक युवक की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हुई।
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ये है बड़ी वजह:
अधिकारियों के अनुसार कानों में ईयर फोन की वजह से ट्रेन के आने या उसके हॉर्न की आवाज नहीं सुनती। ट्रैक को हमेशा ओवरब्रिज या अंडरब्रिज से ही पार करना चाहिए। कानों में ईयर फोन लगाकर कभी भी सीधे ट्रैक पार नहीं करना चाहिए और न ही ट्रैक पर या इसके साथ चलना चाहिए। इसके साथ सेल्फी और रील बनाने के चक्कर में भी दुर्घटनाएं घटित हो जाती हैं। इनके चक्कर में लोग ट्रेन के खतरे को भांप नहीं पाते और ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं। प्लेटफार्म को भी ब्रिज से पार करना, पटरी की ओर खड़े होकर ट्रेन में न चढ़ना और उतरने के साथ स्पीड पकड़ने के बाद ट्रेन में चढ़ने की कोशिश करना खतरनाक बन जाता है। अब धुंध में तो ये ओर भी घातक हो जाता है।
गलती की नहीं माफी, इसलिए करते रहते हैं जागरूक:
जीआरपी और आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि रेलवे ट्रैक पर गलती की माफी नहीं होती क्योंकि गलती के बाद यहां बचने की गुंजाइश नहीं है। इसलिए रेलवे ट्रैक पर कभी भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। एक लापरवाही आपकी जिंदगी के साथ आपके परिजनों पर भी भारी पड़ सकती है। रेल दुर्घटनाओं में जो केस घटित हुए हैं, उनमें लापरवाही सामने आई है।
आरीएफ प्रभारी सुरेंद्र और जीआरपी प्रभारी शाम सिंह ने बताया कि वे समय समय पर लोगों को जागरूक करने का काम भी करते हैं। उनकी टीम रेलवे परिसर से लेकर ट्रैक पर हर समय गश्त करती है। लापरवाही से ट्रैक पार करने वालों को समझाया जाता है। जागरूकता के अभाव की वजह से कई बार लोग हादसों का शिकार हो जाते हैं। कई मामलों में लोगों को बचाया भी जा चुका है।
रेलवे ट्रैक पार करते लोग।