संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जीवन के सफर में जब मुश्किल दौर आया तो महिलाओं ने ई-रिक्शा चलाने में भी संकोच नहीं किया और अपने परिवार की जीविका को संचालित करने के लिए सड़कों पर उतर गईं। ऐसी महिलाएं अपने परिवार का मजबूत सहारा बन रही हैं।
आते-जाते लोगों से महिला होकर रिक्शा चलाने के ताने भी सुनने को मिलते हैं लेकिन वह संघर्ष करने से पीछे नहीं हट रही हैं।
ई-रिक्शा महिला चालकों का कहना है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए घर से निकलना जरूरी हो गया था। अब वे आत्मनिर्भर हैं, ई-रिक्शा चलाने में उन्हें कोई आत्मग्लानि नहीं है।