जिले में किसानों को बूंदाबांदी ने जबरदस्त झटका दिया है। रविवार रात से
सोमवार दोपहर तक रुक-रुककर होती रही बूंदाबांदी से गेहूं फसल में 15
प्रतिशत तक नुकसान है।
फिलहाल मौसम अच्छी तरह नहीं खुला है और उमड़-उमड़ कर
बादल चक्कर लगा रहे हैं। जिले में गेहूं की फसल पककर तैयार है। कृषि
विशेषज्ञ बताते हैं कि मौसम में नमी की मात्रा ही गेहूं को नुकसान पहुंचाती
है।
जिले में एक लाख 70 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं खड़ी है।
गेहूं पक
गई है और चारों ओर गेहूं की पीली परत नजर आ रही है। ऐसे में बारिश की
बूंदें गेहूं की बाली पर लगने से काफी बाली टूट जाती हैं और बहुत से दाना
भीगकर कमजोर पड़ता है। इस समय गेहूूं का पौधा दबाव नहीं सह सकता। बूंद तेजी
से गिरती है और गेहूं के फाने को भी तोड़ देती है।
हवा चलने से बहुत से
गेहूं जमीन पर बिछ गए हैं। फसल भीग गई है और गर्मी अधिक है। इस कारण गेहूं
का दाना कमजोर पड़ना तय है। इससे उत्पादन पर असर पड़ता है। अरड़ाना गांव के
किसान कर्मबीर शर्मा, पप्पू राणा, बबलू ने बताया कि जो एकड़ 50 मन का
निकलना था, बूंदाबांदी से अब 35 मन का ही निकलेगा। क्योंकि पकने के बाद
गेहूं भीगने से दाना कमजोर पड़ता है। जिससे वजन घट जाता है। इससे किसानों
को ही नुकसान है। किसान बताते हैं कि मौसम साफ होते ही गेहूं जल्दी कटवानी
पड़ेंगी। यदि गेहूं नहीं कटवाई ता फाने टूट जाएंगे और बाली गिर जाएगी। इससे
दाना निकालना बहुत मुश्किल हो जाएगा। जो गेहूं 15 अप्रैल के आसपास काटी
जानी थी, अब वह दो चार दिन में कटवाने जैसी हो जाएगी।
मौसम रहा ठंडा
बूंदाबांदी
और ठंडी हवा चलने से मौसम ठंडा रहा। गर्मी के मौसम में लोगों ने ठंड का
एहसास हुआ। सुबह-सुबह सैर पर लोगों ने लुत्फ उठाया। डॉ. दुर्लभ सिंह
बिश्नोई बताते हैं कि यह मौसम स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। बच्चों को ठंड
लगकर छाती रुकना सहित बुखार जैसी स्थिति बन जाती है। ऐसे मौसम में
स्वास्थ्य का ख्याल रखना जरूरी है।