कोरोना के साथ-साथ ब्लैक फंगस से भी जंग जारी है। सरकार इसे महामारी घोषित कर चुकी है और सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कालेजों में इससे ग्रस्त मरीजों के इलाज हेतु 75-75 बेड के वार्ड भी तैयार किए जा चुके हैं। मगर इस महामारी से लड़ने के लिए टीकों की कमी बड़ी बाधा बनकर सामने आ रही है। हालांकि सरकार टीकों के इंतजाम में शिद्दत से जुटी हुई है। मगर वर्तमान में इसकी कमी के चलते ब्लैक फंगस ग्रस्त व संदिग्ध मरीजों और तीमारदारों को भटकना पड़ रहा है।
प्रदेश में स्थिति देखें तो अभी तक ब्लैक फंगस के 1044 मरीज मिल चुके हैं। इनमें से 154 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हो गए हैं। 91 मरीजों की इस बीमारी से मौत भी हो चुकी हैं और 799 मरीज अभी उपचाराधीन हैं। इलाज के दौरान इन मरीजों को एम्फोटेरिसिन-बी के इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। मगर वर्तमान स्टॉक देखें तो स्वास्थ्य महकमे के पास इस टीके की खासी कमी है। विभाग के स्टॉक 05 जून तक केवल 139 टीके ही उपलब्ध हैं।
उधर, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शनिवार को करनाल में दावा करते हुए कहा कि ब्लैक फंगस से
निपटने के लिए व्यापक प्रबंध किए जा रहे हैं। मरीजों के इलाज में कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएंगी। इसके लिए प्रदेश सरकार पूरी तरह गंभीर है। जल्द टीके उपलब्ध हों, इसके लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। उधर, 18 मई से 3 जून तक स्थिति देखें तो स्वास्थ्य महकमा इस दौरान ब्लैक फंगस से इलाज के लिए 6100 टीके ही उपलब्ध करवा सका है। इनमें से 3165 टीके सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में, 2931 टीके प्राइवेट अस्पतालों व मेडिकल कालेजों को इलाज के लिए दिए गए। सरकारी अस्पतालों को सिर्फ 4 टीके ही मिल पाए।
उधर, स्वास्थ्य महकमे ने एम्फोटेरिसिन-बी के 15 हजार टीकों के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया हुआ है। इसकी प्रक्त्रिस्या अभी चल रही है। स्वास्थ्य महकमे के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा के अनुसार अभी 139 टीके स्टॉक में हैं। 3120 टीके भी जल्द उपलब्ध हो जाएंगे। जबकि 15 हजार इंजेक्शन खरीदने का ग्लोबल टेंडर जारी किया हुआ है। कुछ अंतरराष्ट्रीय फर्मों से प्रतिक्त्रिस्या मिल रही है, लिहाजा सावधानी पूर्वक इस दिशा में काम किया जा रहा है। जल्द ही इस बीमारी के लिए पर्याप्त इंजेक्शन उपलब्ध करवाएं जाएंगे। इसके लिए सीएम और स्वास्थ्य मंत्री पूरी तरह गंभीर हैं।
मरीजों पर सर्वे की अलग थ्योरी
हालांकि अभी तक जो बात सामने आ रही है उसमें कोरोना पॉजिटिव, डायबिटीज, स्टेरॉयड का सेवन करने वाले और ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहने वाले मरीजों में ही ब्लैक फंगस से ग्रस्त होने की ज्यादा संभावनाएं जताई जा रही है। मगर हरियाणा स्वास्थ्य महकमे का 413 ब्लैक फंगस के मरीजों पर किए गए सर्वे की कुछ अलग ही थ्योरी है। इस विश्लेषण में ब्लैक फंगस से ग्रस्त 64 मरीज ऐसे पाए गए, जो कभी कोरोना पॉजिटिव नहीं हुए। 79 मरीज ऐसे थे, जिन्हें डायबिटीज की कोई शिकायत नहीं थी। 110 ऐस थे जिन्होंने कभी स्टेरॉयड का सेवन नहीं किया। जबकि 213 मरीज ऐसे थे जो कभी ऑक्सीजन सपोर्ट पर नहीं रहे। लिहाजा इस सर्वे के बाद स्वास्थ्य महकमे के आला अफसर भी चाहते हैं कि इस ब्लैक फंगस के लक्षणों पर अभी और शोध की जरूरत है। ताकि जल्द से जल्द इस पर काबू पाया जा सके।