माई सिटी रिपोर्टर
करनाल/घरौंडा। इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हो गई। करनाल में भी स्थितियां खराब हैं लेकिन अधिकारी जागे नहीं हैं। स्थिति यह है कि वार्ड-14 स्थित गुरुद्वारा वाली गली में पिछले करीब दो माह से दूषित पेयजल की आपूर्ति हो रही है। बदबू वाले और बैक्टिरिया युक्त पानी के सेवन से गली के 55 घरों के बच्चे अब तक पीलिया, दस्त व उल्टी से पीड़ित हो चुके हैं। नगर पालिका और जनस्वास्थ्य विभाग को शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया गया है।
वीरवार को कुछ घरों से पानी के नमूने लिए गए लेकिन पेयजलापूर्ति की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। विभागीय अधिकारियों के निरीक्षण के बाद भी लोग पानी को उबालकर या बाहर से मंगवाकर पीने को मजबूर हैं। पूर्व पार्षद ओंकार शर्मा भी इसी गली में रहते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों में उल्टी-दस्त की शिकायत लगातार बढ़ रही है। बीमार बच्चों के परिजन ने बताया कि वार्ड की लक्ष्मीनारायण मंदिर वाली गली में पिछले लगभग दो सप्ताह से नलों में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है। मजबूरी में लोगों को वही पानी पीना पड़ रहा है, जिसके कारण बच्चों की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। कई बच्चों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा है। क्षेत्र में करीब 50 साल पुरानी पेयजल पाइपलाइन है, जो कई जगहों से लीक है। इसके कारण सीवरेज का व नालों का पानी भी आपूर्ति में मिल रहा है।
पांच साल से किसी ने नहीं ली सुध
पूर्व पार्षद ओंकार दत्त शर्मा ने बताया कि उन्होंने भी इस गंभीर समस्या को लेकर जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से कई बार संपर्क किया था लेकिन पिछले दो सप्ताह से कोई भी कर्मचारी वार्ड में नहीं पहुंचा। बार-बार शिकायत करने के बाद विभाग के दो कर्मचारी पहुंचे और पानी के नमूने लिए। कॉलोनी में पिछले करीब पांच वर्षों से जनस्वास्थ्य विभाग का कोई भी अधिकारी पानी की गुणवत्ता जांचने नहीं आया। यह विभाग की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
बच्चे हैं बीमारफोटो
अमय मित्तल ने बताया कि पानी पीने के बाद तबियत खराब हुई। अचानक से उल्टी और दस्त होने लगे थे।
नव्या का कहना है कि उनकी तबियत खराब है। परिवार के अन्य लोग भी बीमार हैं। कई दिनों से गंदा पानी आ रहा है।
कियान ने बताया कि तबियत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। पिता मीनू ने बताया कि कई बार शिकायत भी कर चुके हैं।
सैंपल ले लिए हैं, रिपोर्ट आने के बाद ही आगामी कार्रवाई करेंगे। जरूरत हुई तो लाइन भी बदली जा सकती है। पानी की गुणवत्ता के बारे में भी निर्णय लेेंगे। - विनोद आर्य, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग