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किसानों में दिखा आक्रोश पर नहीं खोया ‘होश’

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55: कमेंटी चौक पर दुकानदारो से बंद की अपिल करते किसान और चौक पर खड़ी पुलिस फोर्स। अमर उजाला
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देव शर्मा
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करनाल। भारत बंद के दौरान किसानों के चेहरों पर जहां आक्रोश था, वहीं विनम्रता और मानवता भी दिखी। किसानों ने इंद्री में जहां एक ओर भाजपा नेताओं के पोस्टर फाड़कर गुस्से का इजहार किया, वहीं इंद्री में दिवंगत परिजन की अस्थियां प्रवाहित करने जा रहे परिवार को तत्काल रास्ता दिया। साथ ही दुकानें बंद कराने के लिए हाथ जोड़कर अपील करते नजर आए। यही कारण है कि बंद का व्यापक असर होने के बाद भी आंदोलन शांतिपूर्ण रहा और कहीं हिंसा नहीं हुई।
तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे किसान करीब दस माह से आंदोलनरत हैं। इस दौरान कई किसानों की जान चली गई। सोमवार को भारत बंद के दौरान भी दिल्ली बार्डर पर हार्ट अटैक से एक किसान की मौत हो गई। इससे किसानों में गुस्सा है। समय-समय पर यह सामने आता रहा है। चाहे सीएम सहित अन्य भाजपा नेताओं का विरोध हो या फिर हाईवे जाम, कई बार किसानों के उग्र रूप भी देखने को मिले हैं।
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सोमवार को भारत बंद के दौरान भी बाजारों को बंद कराते समय भले ही किसानों के हाथों में डंडे थे, लेकिन वे व्यापारियों के आगे हाथ जोड़ते नजर आए। किसी दुकानदार के साथ कोई अभद्रता नहीं की गई। इससे पहले हरियाणा व्यापार मंडल के जिला प्रधान कृष्ण लाल तनेजा व करनाल व्यापार मंडल के जिला प्रधान डा.जेआर कालड़ा ने बाजार खोलने का निर्णय लिया था, लेकिन जब एक साथ किसान बाजार में उतरे तो माहौल कुछ ऐसा बन गया कि दुकानदारों ने दुकानें बंद कर ली।
दूसरी ओर इंद्री में जब कार सवार परिवार ने यह बताया कि वे अपने दिवंगत परिजन के फूल गंगा में प्रवाहित करने हरिद्वार जा रहे हैं तो किसानों ने तत्काल रास्ता दे दिया। घरौंडा में भी कुछ महिलाओं ने जब मजबूरी बताई तो किसानों ने रास्ता दिया। भारत बंद के दौरान सभी एंबुलेंस, सेना के वाहनों व आवश्यक सामग्री वाले वाहनों को नहीं रोका गया। बाजारों में भी आवश्यक वस्तुओं में शामिल मेडिकल स्टोर्स को किसानों ने बंद नहीं कराया।
दुकानदारों-किसानों के बीच दिखा लुकाछिपी का खेल
करनाल। मुख्य बाजारों में लुकाछिपी का खेल भी दिखा। पहले किसान एक बार आए तो दुकानें बंद हुई लेकिन उनके जाते ही फिर खुल गईं। किसानों ने भी एक रणनीति तैयार की थी। इसके तहत एक जत्थे के पीछे कुछ देर बाद दूसरा जत्था आ जाता था। इस कारण दुकानें बंद करनी ही पड़ी। दुकानदार व उनके कर्मचारी शाम को चार बजे तक दुकानों के आगे ही बैठे रहे।
कई दुकानदार ऐसे दिखे, जिनका पूरा स्टाफ दुकान के अंदर था। सिर्फ एक व्यक्ति गेट पर तैनात रहा। जब किसानों का जत्था आता था, तो शटर गिरा देते थे, जब चले जाते थे तो शटर खोल देते थे। कई दुकानदारों ने अपने आधे शटर खुले रखे। किसानों के पहुंचने पर पूरा शटर बंद कर देते थे।
भाजपा विधायक के कार्यालय पर फूटा किसानों का गुस्सा
इंद्री। करनाल-यमुनानगर रोड पर इंद्री के विश्राम गृह के पास जब किसान भारत बंद के समर्थन में जाम लगा रहे थे तो किसानों की नजर भाजपा के इंद्री विधायक रामकुमार कश्यप के कार्यालय पर पड़ गई। वहां भाजपा नेताओं के पोस्टर भी लगे थे। फिर क्या था, किसानों का गुस्सा भाजपा विधायक के कार्यालय पर फूट पड़ा और किसानों ने कार्यालय के बोर्ड को उखाड़कर एक तरफ फेंक दिया। इसके बाद किसानों ने बस स्टैंड के पास लगे भाजपा नेताओ के होर्डिंग्स को भी फाड़ दिया।
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स्वेच्छा से दुकानदारों ने बंद नहीं किया बाजार
-व्यापारियों ने अपनी इच्छा से बाजार बंद नहीं किया है। जब किसान बड़ी संख्या में बाजार में आ गए तो दुकानदारों ने किसी दुर्घटना की आशंका के तहत दुकानें बंद कर ली। दुकानदार बाजार खोलना चाहते थे। बाजार बंद रहने का कारण भारी नुकसान हुआ है।
-कृष्ण लाल तनेजा, जिला प्रधान हरियाणा व्यापार मंडल करनाल।
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