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डेंगू के नाम पर आंकड़ों से खेल रहा स्वास्थ्य विभाग

Tue, 24 Sep 2013 10:47 PM IST
करनाल
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डेंगू बुखार के नाम पर स्वास्थ्य विभाग में बड़ा खेल हो रहा है। रोज मरीजों की संख्या बढ़ रही है और लोग बेहाल हैं। पर विभाग नहीं मानता कि कहीं डेंगू का प्रकोप है।
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न ही स्वास्थ्य विभाग प्राइवेट लैब की रिपोर्ट को सही मानता है। अगर लोग इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज आते हैं तो उन्हें समय पर रिपोर्ट नहीं मिलती और न ही जांच होती है। यही कारण है कि डेंगू के रोगी रोज बढ़ रहे हैं और विभाग लीपापोती कर रहा है।

कल तक विभाग जिस फॉगिंग को मलेरिया और डेंगू की रोकथाम के लिए जरूरी बता रहा था, आज उससे पर्यावरण को नुकसान का बहाना गढ़कर अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश कर रहा है। सीएमओ कहती हैं कि बिना मरीज मिले, फॉगिंग करने से पर्यावरण प्रदूषित होता है। फिर भले डेंगू के मरीज कितने ही क्यों न बढ़ जाएं? खुद ही देखिए कि विभाग के दोहरे मापदंड में सही स्थिति कैसे सामने आ सकती है।
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रोजाना सामने आ रहे नए मामले
जिले में रोजाना डेंगू के मरीज सामने आ रहे हैं। अब तक एक हजार से अधिक मरीज जिले के विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं या करा चुके हैं। आठ लोग डेंगू की वजह से काल का ग्रास बन गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के कानों पर जूं नहीं रेंग रही, बल्कि विभाग कहता है कि डेंगू रोगी तो जिले में हैं ही केवल 53। जो रिपोर्ट प्राइवेट क्लीनिक दे रहे हैं। वह तो सही है ही नहीं। किसी के भी पास ऐसी जांच की ही व्यवस्था नहीं है कि वह डेंगू की सही पुष्टि कर सके।

यह पहली बार हो रहा है कि स्वास्थ्य विभाग के पास जांच उपलब्ध है और प्राइवेट में नहीं है। अगर गलती से लोग यहां इलाज के लिए आते हैं तो उनकी दस दिन तक रिपोर्ट नहीं आती है। तब किट महंगी होने का बहाना कर मरीजों की संख्या बढ़ाने की बात होती है। ऐसे में डेंगू को लेकर सही आंकड़ा कैसे सामने आ सकता है।

यही खेल विभाग खेल रहा है। विभाग फॉगिंग भी किसी इलाके में तब कराता है, जब उन्हें वहां डेंगू की सही पुष्टि हो जाती है। अकेले शहर के महाबीर दल अस्पताल में अब तक करीब दो सौ डेंगू रोगी इलाज ले चुके हैं और तीस मरीज इस समय दाखिल हैं।

फॉगिग का असर केवल दो ही दिन
सिविल सर्जन डॉ. वंदना भाटिया ने बताया कि अब तक मात्र 53 लोगों को डेंगू की पुष्टि हुई है। यह भी वह रोगी हैं, जो सीएमओ की ओर से सिरोलोजी टेस्ट कराए गए हैं। इनका कहना है कि निजी अस्पतालों में यह टेस्ट होता ही नहीं। इसके बगैर डेंगू का सही पता नहीं लगता।

जब इनसे पूछा गया कि निजी अस्पताल झूठी रिपोर्ट दे रहे हैं तो कारवाई क्यों नहीं करते तो सीएमओ का जवाब था कि सभी निजी अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए हैं कि डेंगू होने पर रोगियों के सैंपल सिरोलोजी टेस्ट के लिए यहां भेजें। उनके पास कोई सैंपल नहीं भेजता है। इसके लिए आईएमए को भी बोला गया है। फॉगिंग से वायु प्रदूषण होता है और इसका असर भी केवल दो ही दिन रहता है।

पोपड़ा में मिला डेंगू का मरीज
असंध के गांव पोपड़ा में एक युवक को डेंगू होने का मामला सामने आया है। युवक का जींद स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इसकी जानकारी के प्रति अनभिज्ञता जाहिर की है।

युवक जितेंद्र पुत्र कृष्ण ने बताया कि करीब दस दिन पूर्व उसे एकाएक पेट दर्द, उल्टी, दस्त व बुखार की शिकायत हुई थी। अगले दिन उल्टी व दस्त की शिकायत तो दूर हो गई लेकिन तेज बुखार का सिलसिला लगातार जारी रहा। बाद में जींद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

वहां जांच के दौरान उसके खून में प्लेटलेट्स सामान्य से कम मिले। इसके चलते उसका डेंगू बुखार का इलाज शुरू किया गया। इस समय उसका जींद के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। ग्रामीणाें ने बताया कि गांव में सफाई व्यवस्था चौपट है व निकासी व्यवस्था का बुरा हाल है।

सभी तालाब गंदे पानी व गंदगी से अटे पड़े हैं और ओवरफ्लो पानी की निकासी का कोई भी बंदोबस्त नहीं है। उन्होंने आशंका जताई है कि तालाबों के रुके हुए पानी में एडीज मच्छर के लारवा हो सकते हैं। उधर, सामान्य अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. मुनीष गोयल ने बताया कि फिलहाल उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। गांव में चिकित्सक दल भेजकर इसकी जांच कराई जाएगी।
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