सीएम सिटी में डेंगू ने पांव पसार लिए हैं। अलबत्ता शहर में इस समय लोगों
को डेंगू का डर सताने लगा है। शिव कॉलोनी में एक साथ 5 संदिग्ध मरीज मिलने
से स्वास्थ्य विभाग की सांसें फूल गई हैं। इन सभी मरीजों को प्राइवेट
अस्पतालों के डॉक्टरों ने डेंगू पीड़ित घोषित कर दिया है, वहीं विभाग ने
प्राइवेट डॉक्टरों की इस रिपोर्ट को गलत करार देते हुए प्राइवेट अस्पतालों
पर लगाम कसने की बात कही है।
अमर उजाला की टीम मंगलवार सुबह जब शिव कॉलोनी
गली नंबर तीन पहुंची तो वहां की स्थिति बहुत ही भयंकर थी। गली नंबर तीन में
इस समय हाल यह है कि यहां हर घर में एक व्यक्ति बुखार से पीड़ित है।
स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में प्राइवेट डॉक्टरों सहित झोलाछाप डॉक्टरों
पर लोगों के बहकाने का आरोप जड़ दिया है। कॉलोनीवासियों ने बताया कि अभी तक
एक बार भी यहां विभाग ने फॉगिंग नहीं कराई। वे खुद मिलकर गली में
दवा का स्प्रे करा रहे हैं।
ये हैं शिव कॉलोनी में डेंगू से पीड़ित
सुरेखा
(22) पत्नी मुकेश मकान नंबर 3185, केतन नंदा (11) पवन नंदा मकान नंबर
4011, रजनी (20) पुत्री प्रताप मकान नंबर 1132, जितेंद्र (34) पुत्र
रामकिशन व अनिल सैनी (50) मकान नंबर 4010 इन सभी को प्राइवेट डॉक्टर ने
डेंगू का घोषित मरीज बता दिया है। रजनी अभी निजी अस्पताल में भर्ती है।
उसके भाई दीपक ने बताया कि सोमवार को रजनी के प्लेटलेट्स 80 हजार हो गए थे।
उसे सांस लेने में भी दिक्कत थी। बुखार भी तेज हो गया था। मंगलवार को
प्लेटलेटस 90 हजार मिले। इससे पहले जब प्लेट्लेटस चेक कराए थे तो 1 लाख 12
हजार थे। करीब 15 दिनों से रजनी को बुखार आ रहा है। केतन के पिता पवन ने
बताया कि उसके बेटे को 8 दिनों से बुखार है। उसके बेटे का इलाज सेक्टर-6
स्थित निजी अस्पताल में चल रहा है। केतन के शरीर पर लाल रंग के दाने, तेज
बुखार व सुजन हो गई थी। डॉक्टर ने डेंगू की पुष्टि की थी।
इन्हें है कई दिनों से बुखार
शिव
कॉलोनी की गली नंबर 3 में ही सरोज (25) पत्नी राजू मकान नंबर 3891, संतोष
(27) पत्नी रामकुमार मकान नंबर 3890, गौरव (19) मकान नंबर 3972, राकेश
कुमार (35) पुत्र मोहन लाल मकान नंबर 81, प्रिया (08) पुत्री विक्की मकान
नंबर 21 इन सभी को पिछले कई दिनों से बुखार आ रहा है। इनमें से गौरव ने
अपनी रिपोर्ट दिखाते हुए बताया कि बुखार के चलते उसके प्लेटलेट्स 88 हजार
तक पहुंच गए थे। डॉक्टर ने उसे टाइफाइड सहित डेंगू भी बताया है।
टेस्ट के नाम पर लूट, विभाग के पास मुफ्त सुविधा
डेंगू
की जांच के लिए प्राइवेट अस्पताल एक कार्ड रीडर से टेस्ट करते हैं। इसकी
साथ की साथ रिपोर्ट आ जाती है। इसके लिए 600 से 700 रुपये तक की फीस वसूली
जाती है। इसमें रक्त की बूंद लगाते ही यह बता देता है कि मरीज को डेंगू है
या नहीं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम इस टेस्ट को नहीं मानती। स्वास्थ्य
विभाग के अनुसार डेंगू की पुष्टि एलाइजा रीडर से ही हो सकती है। यह टेस्ट
केवल और केवल सिविल अस्पताल में ही होता है। इसके लिए मरीज से कोई भी चार्ज
नहीं लिए जाते, यह टेस्ट एकदम नि:शुल्क है।
स्टेट लैब की रिपोर्ट के बिना नहीं कर सकते डाक्टर डेंगू की पुष्टि
उप
सिविल सर्जन डाक्टर सरोज ने बताया कि उन्होंने इंडियन मेडिकल एसो. के
प्रधान डॉ. अरविंद को इस मामले में कदम उठाते हुए कार्रवाई करने का आह्वान
किया है। डॉक्टर सरोज ने बताया कि स्टेट लैब की रिपोर्ट के बिना कोई भी
डॉक्टर मरीज को डेंगू की पुष्टि नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि कुछ
डॉक्टर अपनी जेब भरने के लिए प्लेटलेट्स कम बताकर या कार्ड रीडर से टेस्ट
करके मरीज को डेंगू बताकर डरा देते हैं, जो सही नहीं है। उन्होंने कहा कि
डेंगू से डरने की नहीं उससे लड़ने की जरूरत है।
मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़
महावीर
दल में डेंगू की संदिग्ध मरीज को दूसरे मरीजों के साथ ही रखा गया है। ऐसे
में इन मरीजों को कभी भी संक्रमण अपनी चपेट में ले सकता है। ध्यान रहे कि
डेंगू के मरीजों के लिए आईसोलेटिड वार्ड में रखा जाता है। इस तरह दूसरे
मरीजों के बीच सामान्य वार्ड में रखने से डेंगू उनको भी अपनी चपेट में ले
सकता है।
31 में से 22 फेल, शेष की रिपोर्ट आनी बाकी
पिछले 3
दिनों में स्वाथ्य विभाग की टीम ने 31 संदिग्ध डेंगू के मरीजों के सैंपल
लिए हैं। इनमें से 22 फेल मिले हैं। 9 सैंपल मंगलवार को लैब में भेजे गए
हैं। इनकी रिपोर्ट बुधवार तक आ जाएगी। प्राइवेट डॉक्टर लोगों में डर फैला
रहे हैं। इनसे बचने की जरूरत है। सिविल अस्पताल में डेंगू के नि:शुल्क
टेस्ट व इलाज की सुविधा है। शिव कॉलोनी में बुधवार को फॉगिंग करा दी जाएगी।
डॉ. अनीता अग्रवाल, सिविल सर्जन करनाल।