सरकार ने आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा के साथ आज 13 सितंबर को आयोजित होने वाली बैठक को एक दिन पहले रद कर दिया है। जिससे आहत होकर जिला करनाल की सभी आशा कर्मी बैठक रद होने के विरोध स्वरूप मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगी। इसको लेकर आशा वर्कर्स यूनियन व अन्य सहयोगी कर्मचारी यूनियनों ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। आज दोपहर 12 बजे सिविल सर्जन कार्यालय से सैंकड़ों की संख्या में विरोध प्रदर्शन करते हुए आशा कर्मियों का जत्था सीएम आवास के घेराव के लिए रवाना होगा।
आशा वर्कर्स यूनियन जिला करनाल की उप-प्रधान नीरू ने बताया कि सरकार अपनी हठधर्मिता को चरम सीमा पर ले जा चुकी है। आशा कर्मी पिछले 36 दिनों से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल व प्रदर्शन पर है। जिसको देखते हुए सरकार ने 37वें दिन यानी आज 13 सितंबर को आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा के एक प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया था लेकिन सरकार ने अपनी मनमानी करते हुए वार्ता से एक दिन पहले उसे रद कर दिया है। ऐसे में लग रहा है कि सरकार आमजन को स्वास्थ्य सुविधाओं सहित अन्य सुविधाएं नहीं देना चाहती।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ व महिला सशक्तिकरण पर लंबे चौड़े भाषण तो देते है परंतु बेटियों व महिलाओं की बात तक नहीं सुनते। सरकार की इस तानाशाही से वर्कर्स में सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री को सचेत करते हुए कहा कि समय रहते मांगों का समाधान किया जाए वरना आशा वर्कर्स ने 2018 के इतिहास दोहराने की तैयारी कर ली। इसका एहसास वे आज के सीएम आवास घेराव में जता देगी कि वे अपनी हड़ताल व प्रदर्शन से पीछे हटने वाली नहीं है। जब तक सरकार उनकी मांगें पूरी नहीं करती है तब तक वे हड़ताल पर रहेगी। इस मौके पर ओपी माटा, सतीश कुमार, धीरज सिंह रावत, कामरेड जगमाल सिंह, शिशपाल, रूपा राणा, मंजू बवेजा, कांता, जगदीश, नीरू, सुरेशो, शोभा, गीता व लाभ सिंह आर्य मौजूद रहे।
बुनियादी 40 कामों के अतिरिक्त रोज नए काम थोप रही सरकार
जिला सचिव सुदेश ने बताया कि अब सरकार आशा कर्मियों से उनके इन बुनियादी 40 कामों के अतिरिक्त रोज नए-नए काम थोप रही है। आशा कर्मी पर तमाम तरह के सर्वे ऑनलाइन करने, एनसीडी का सर्वे, आयुष्मान भारत कार्ड की केवाईसी करने, कार्ड जनरेट करने, टीबी सर्वे तो और गांव नशा करने वालों की संख्या और वह किस प्रकार का नशा करते हैं यह सभी काम सरकार आशा कर्मियों से बिल्कुल फ्री में करवा रही है। इसके बावजूद सरकार की ओर से पिछले पांच सालों से आशा कर्मियों के मानदेय और प्रोत्साहन राशियों में कोई वृद्धि नहीं की गई है जबकि काम तीन गुणे बढ़ा दिए गए और महंगाई दोगुनी हो गई है।