कैथल में एक नवंबर 1989 को बने कैथल जिले को शुक्रवार को आज 24 साल हो गए हैं। इस दौरान कैथल ने विकास और पिछड़ेपन के कई रास्ते तय किए।
अब कैथल विकास की डगर पर है, जिले में जहां विभिन्न क्षेत्रों में विकास तेजी से हो रहा है, वहीं खाद्यान्न के लिए विख्यात होने के बावजूद जिले में खाद्य पदार्थों पर आधारित उद्योगों की अभी कमी खलती है। बावजूद इसके पिछले कुछ वर्षों में जो विकास की रफ्तार कैथल ने पकड़ी है, वह दूसरे जिलों के लोगों के लिए ईर्ष्या का कारण हो सकती है। विकास की यह डगर अब रुकती नहीं दिख रही है।
वर्ष 2031 तक कैथल शहर में 40 सेक्टर होंगे, जिसमें एक इंडस्ट्रीयल, एक कमर्शियल और एक संस्थाओं के लिए सेक्टर होगा। इतना ही नहीं जिले की बाउंड्री भी कई किलोमीटर हो जाएगी।
ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है जिला
महाभारत काल से ऐतिहासिक इस जिले में महाभारत काल के युद्ध का केंद्र बिंदू रहा है, जिसमें अभी भी कई महत्वपूर्ण गांव हैं। जहां महाभारत काल के ऐतिहासिक एवं पौराणिक तथ्य मिलते हैं।
ग्यारह रूद्री शिव मंदिर, अरंतुक यक्ष, गांव सेरहधा, देवबन सहित अनेकों ऐसे गांव हैं, जहां महाभारत काल के अवशेष मिलते हैं। जिला कैथल प्राचीन समय से व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। लाहौर-दिल्ली मुख्य मार्ग पर स्थित था हमारा जिला।
कालांतर में यह मार्ग जीटी रोड में तबदील हो गया। यहां चना, गुड़ सहित अन्य फसलें होती थीं। इसके अलावा ऐतिहासिक एवं प्राचीन महत्व के वृद्धकेदार तीर्थ, मुगलकाल कालीन बावड़ी, कैथल रियासत के राजा भाई उदय सिंह का किला एवं अन्य कई ऐतिहासिक इमारतें इस समय भी नगर के समृद्ध इतिहास से परिचय करवाती हैं।
वर्तमान में बड़ी परियोजनाएं पूरी
जिले में इस समय नया बस अड्डा, 12 करोड़ की लागत से राजकीय कॉलेज जगदीशपुरा, विवेकानंद पुस्तकालय, 16.50 करोड़ की लागत से 100 बेड का मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल, 6.75 करोड़ की लागत से जाखौली अड्डा स्थित राजकीय कन्या स्कूल, 1.74 करोड़ की लागत से पीडब्ल्यूडी में 7 नए कमरों का ब्लॉक, शक्ति भवन, जल भवन, पुलिस लाइन, आईटीआई का नवीनीकरण, शहर में 88 लाख की लागत से बनकर तैयार हुआ तारामंडल, चिल्ड्रन पार्क, राजीव गांधी अत्याधुनिक पार्क, श्रीराम उत्सव स्थल चंदाना गेट, महर्षि वाल्मीकि सामुदायिक केंद्र 1.90 करोड़, शहीद उद्यम सिंह पार्क, ड्राइविंग स्कूल, ट्रैफिक पार्क, रेलवे ओवर ब्रिज 23.65 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हो चुका है।
जिले में लंबित विकास कार्य
शेरगढ़ में बनेगा 8 करोड़ से पॉलिटेक्निक कॉलेज, बस अड्डे के निकट ट्रैफिक पार्क, पुराने बस अड्डे के स्थान पर मनोरंजन स्थल, भाई उदय सिंह के किले के निकट ओपन एयर थिएटर, सेक्टर 21 में इंडोर स्टेडियम एवं जिमखाना क्लब, आरकेएसडी कॉलेज में इंडोर स्टेडियम का काम लंबित पड़ा है।
जल संकट खतरनाक
जलस्तर गिरने की दर एक मीटर तक प्रतिवर्ष की दर से नीचे गिर रहा है जलस्तर कलायत, राजौंद में स्थिति खतरनाक, भूमि में बढ़ रहे हैं सॉल्ट उत्पादकता के लिए बन सकता है बड़ा खतरा
दिल्ली तक सीधी रेलसेवा
शहर को दिल्ली तक सीधी रेलसेवा और रेलवे स्टेशन के विस्तार की बड़ी आवश्यकता है। लोगों को बड़े शहरों के लिए कुरुक्षेत्र या फिर जींद जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती हैं। मंजूरी के बावजूद यह सेवा लटकी हुई है।
जिले में सात नए सेक्टर बढ़ेंगे
वर्ष 2031 के प्लान में तबदीली की गई है। अब शहर में सेक्टरों की संख्या बढ़कर 40 हो गई है। विभाग की ओर से 7 नए सेक्टर प्लान किए गए हैं। डीटीपी अशोक गर्ग ने बताया कि कैथल जिले के मास्टर प्लान 2031 के अनुसार 2031 तक यहां 40 सेक्टर होंगे, जिसमें नए 4 रिहायशी सेक्टरों के अलावा एक इंडस्ट्रीयल, एक कमर्शियल एवं एक संस्थाओं के लिए होगा। साथ ही कैथल शहर का इलाका बढ़कर 3568 हेक्टेयर में हो जाएगा। जो इस समय करीब 1300 हेक्टेयर के आस-पास है।
बड़े जिलों की श्रेणी में आएगा कैथल : सुरजेवाला
कैथल हलका से विधायक एवं मंत्री रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कैथल जिले में चल रहे विकास कार्य अब करीब पूरे हो गए हैं। इनके बाद जिले का स्वरूप ही कुछ ओर होगा। यह विकास की एक शुरुआत है। लोगों के सहयोग से निरंतर चलने वाली विकास प्रक्रिया के चलते कैथल जिला बड़े जिलों की श्रेणी में आएगा और यह एक बड़ा पर्यटन केंद्र बनकर उभरेगा।
जिले में लॉ कॉलेज की जरूरत
विधायक रामपाल माजरा का कहना है कि कैथल पहले ही लोकसभा क्षेत्र होता था। पूर्व उप-प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल एवं चौधरी ओमप्रकाश चौटाला के संघर्ष के बाद कैथल जिला बना। इनेलो के समय में ही कैथल में कई बड़े प्रोजेक्ट लगे, जिसका आज जनता को लाभ मिल रहा है। कैथल जिले में इस समय एक लॉ कॉलेज की आवश्यकता है। इनेलो की सरकार आने पर विकास को तेज किया जाएगा।