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हौसलों की डिग्री : किसी ने उम्र को हराया, किसी ने हालात

Wed, 08 Apr 2026 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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इग्नू के दीक्षांत समारोह में मुख्यअति​थि को सम्मानित करते डायरेक्टर धर्मपाल। संवाद
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काजल पांचाल
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करनाल। डिग्री सिर्फ कागज नहीं संघर्षों की कहानी होती है जिन्हें लोग चुपचाप जीते हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में इस बार ऐसे चेहरे सामने आए, जिन्होंने उम्र, आर्थिक तंगी, असफलता और सामाजिक सोच समेत हर चुनौती को पीछे छोड़कर अपनी राह खुद बनाई। किसी ने 70 की उम्र में पढ़ाई जारी रखी, किसी ने असफलता से निराशा में डूबने के बाद उबरकर नई शुरुआत की, तो किसी ने शादी और जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखा।

- 70 की उम्र में भी सीखने की भूख बरकरार : डॉ. निर्मला
एक मिनट तक तालियों की गडगड़ाहट के साथ पूरे सभागार में स्वागत के साथ मंच पर पहुंची डॉ. निर्मला सहरावत ने 70 की उम्र में सातवीं डिग्री लेकर साबित कर दिया पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। रोहतक की डॉ. निर्मला सहरावत ने इग्नू से समाजशास्त्र में मास्टर्स की डिग्री हासिल की, जो उनकी सातवीं डिग्री है। इससे पहले विभिन्न विश्वविद्यालयों से कई डिग्रियां और पीएचडी कर चुकी हैं। वह कुरुक्षेत्र कॉलेज प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत्त हैं। इतनी उपलब्धियों के बाद भी उनका लक्ष्य अभी बाकी है। वह अब डीलिट करना चाहती हैं।
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- आर्थिक तंगी ने रोका, लेकिन सपना आज भी जिंदा : निधि
शामली की निधि के चेहरे पर डिग्री मिलने की खुशी थी, लेकिन आंखों में एक अधूरा सपना भी साफ झलक रहा था। उनका सपना लॉ की पढ़ाई करने का था, लेकिन आर्थिक तंगी ने उनकी राह रोक दी। उन्होंने बताया कि 2021 में एलएलबी की परीक्षा भी दी लेकिन घर की खराब आर्थिक स्थिति के कारण आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पाईं। इस दौरान मानसिक रूप से भी काफी संघर्ष करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इग्नू से एमए हिस्ट्री में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की। उन्होंने कहा कि जैसे ही हालात सुधरेंगे, लॉ की पढ़ाई दोबारा शुरू करेंगी।

- नौवीं डिग्री लेकर भी सीखने का जुनून कायम : डॉ. कांबोज
करनाल के डॉ. अनिल कांबोज उन लोगों में से हैं, जिनके लिए शिक्षा कभी रुकने वाली प्रक्रिया नहीं है। इस दीक्षांत समारोह में उन्होंने अपनी नौवीं डिग्री हासिल की। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से उन्होंने क्लिनिकल न्यूट्रिशन में डिग्री प्राप्त की। इससे पहले वह औषध विज्ञान में पीजी और पीएचडी कर चुके हैं, साथ ही योगा और अन्य क्षेत्रों में भी कई डिप्लोमा कर चुके हैं। वह इग्नू से अकादमिक काउंसलर के रूप में भी जुड़े हैं। उनका मानना है कि शिक्षा सिर्फ खुद के लिए नहीं, बल्कि समाज को बेहतर बनाने का माध्यम है। जितना सीखेंगे, उतना दूसरों को सिखा पाएंगे।


- असफलता से सीखकर दूसरों को दे रहे नई राह : नितेश
रोहतक के नितेश चौहान चार साल तक नीट की तैयारी करते रहे, लेकिन आर्थिक तंगी और असफलता ने उन्हें गहरे अवसाद में डाल दिया। उन्होंने खुद को संभाला और इग्नू से पढ़ाई जारी रखी। आज वह एमबीए (होटल मैनेजमेंट) कर रहे हैं। अपने अनुभव को ताकत बनाकर बच्चों को पढ़ाना शुरू किया है। आज उनके साथ सोशल मीडिया पर एक लाख से ज्यादा छात्र जुड़े हैं, जिन्हें वह केमिस्ट्री पढ़ाते हैं।



- बिजनेस, परिवार और पढ़ाई साथ-साथ चल रहे : यशांक

पानीपत के यशांक डोगरा की कहानी आज के युवाओं के लिए एक अलग संदेश देती है। उन्होंने 10वीं के बाद ही कॉरेस्पोंडेंस से पढ़ाई शुरू कर दी थी, क्योंकि बिजनेस में हाथ बंटाना था। फिर 2011-12 में एमकॉम के बाद कहीं न कहीं सीखने की कमी महसूस होती रही। तब इग्नू से एमए हिंदी में दाखिला लिया। आज वह बिजनेस संभालने के साथ-साथ यूट्यूब चैनल चलाते हैं, जहां हर शुक्रवार को फिल्म रिव्यू करते हैं। उनका मानना है कि सीखना कभी खत्म नहीं होता, बस जरूरत होती है खुद को आगे बढ़ाने की।

- लड़कियों को क्यों रोका जाए, शादी के बाद भी जिया सपना
पानीपत से एक नवविवाहित जोड़ा दीक्षांत समारोह में पहुंचा। पत्नी की उपलब्धि को पति ने पूरे गर्व के साथ सराहा। निशा ने ग्रेजुएशन के बाद इग्नू से एमबीए फाइनेंस की डिग्री हासिल की है और अब आगे की पढ़ाई की तैयारी कर रही हैं। उनके पति कर्ण ने कहा कि जब लड़कों को आगे बढ़ने से नहीं रोका जाता, तो लड़कियों को क्यों रोका जाए। उनका कहना है क अगर हर लड़की को परिवार का ऐसा सहयोग मिले, तो वह शादी के बाद भी अपने सपनों को उड़ान दे सकती है।
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- शिक्षक ने ही बनकर फिर छात्र, हिंदी के लिए बढ़ाया कदम
विनोद नीलोखेड़ी के एक सरकारी विद्यालय में समाजशास्त्र पढ़ाने वाले विनोद कुमार ने खुद को बेहतर बनाने के लिए फिर से छात्र बनने का फैसला किया। उन्होंने इग्नू से एमए हिंदी की डिग्री हासिल की। उनका कहना है कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और इसे गहराई से समझना जरूरी है। अब वह आगे अंग्रेजी की पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं, ताकि अपने विद्यार्थियों को और बेहतर तरीके से मार्गदर्शन दे सकें।

इग्नू के दीक्षांत समारोह में मुख्यअतिथि को सम्मानित करते डायरेक्टर धर्मपाल। संवाद

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