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कोरोना से तो जीते अब शुगर, बीपी और घबराहट से लड़ रहे मरीज

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कोरोना से तो जंग जीत गए, लेकिन अब आगे की जिंदगी में कई मरीजों में उसके दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं। किसी को शुगर और बीपी की परेशानी हो रही है तो कोई घबराहट से परेशान है। डॉक्टरों की मानें तो यह दिक्कतें भी कई मरीजों में कोरोना के इलाज के दौरान दी गई स्टेरायड के कारण हुई है, जबकि कुछ में कोरोना के लक्षण आने पर भी इलाज न लेना या संक्रमित होने पर भी स्थिति को छुपाये रखना माना जा रहा है।
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नागरिक अस्पताल में बने पोस्ट कोविड केयर सेंटर में कोरोना को हराने के बाद नई बीमारी का शिकार हुए रोजाना औसतन छह मरीज सामने आ रहे हैं। एक जून को शुरू हुए केंद्र में अब तक 168 मरीजों का पंजीकरण करके इलाज शुरू किया जा चुका है। हालांकि जिले में अब तक सामने आए कोरोना के 39896 मरीजों में नई बीमारी का शिकार होने वाले मरीजों का आंकड़ा करीब 0.4 प्रतिशत ही है, लेकिन नई बीमारी सामने आना चिंता का विषय है। कोरोना के कुल मामलों में से 39303 मरीजों ने जंग जीती है। -ब्यूरो
डॉक्टर बोले, शुगर के मरीजों की दिक्कतें ज्यादा बढ़ी
केंद्र में ड्यूटी दे रहे नागरिक अस्पताल के डॉ. कुलबीर सिंह सैनी और डॉ. अंजना पंवार ने बताया कि पोस्ट कोविड मरीजों में मिलने वाले लक्षणों में सामान्य कमजोरी, खांसी और घबराहट के मामले ज्यादा हैं। यह दिक्कत उनमें देखी गई है, जो कोरोना से पहले पूरी तरह से स्वस्थ थे। वहीं जो पहले शुगर के मरीज थे, उनका शुगर लेवल अब बढ़ा है। कोरोना के इलाज में स्टेरायड इन दिक्कतों की बड़ी वजह है।
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इन मामलों से समझे क्या आ रही दिक्कत
कोरोना के बाद से मेरी टांगे पहले की तरह काम नहीं करती। ज्यादा देर तक चल नहीं पाता, न ही खड़ा रह पाता हूं। -अनिल कुमार, मॉडल टाउन
कोरोना होने के बाद से सांस लेने में दिक्कत होने लगी है। कई बार घबराहट भी होती है। डॉक्टर द्वारा निर्धारित डाइट प्लान फालो कर रहे हैं। -भारती, सैनी कालोनी
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पांच डॉक्टरों वाली 10 सदस्यीय टीम की है विशेष निगरानी
केंद्र में पांच डॉक्टरों समेत कुल 10 सदस्यों की टीम पोस्ट कोविड मरीजों पर निगरानी रख रही है। हर 15 दिन बाद मरीज की स्थिति का जायजा लिया जाता है। टीम में योग, आयुर्वेद विशेषज्ञ, फिजियोथैरेपिस्ट भी शामिल हैं। पंजीकरण के बाद मरीज की जांच कर सरकार द्वारा जारी हिदायतों के आधार पर 10 तरह के टेस्ट कराए जाते हैं। उसके बाद डाइट चार्ट निर्धारित करते हुए इलाज दिया जाता है। सामने आए मरीजों में अभी तक कोई मौत नहीं है। ज्यादातर मरीज ठीक हो रहे हैं। -डॉ. योगेश शर्मा, सीएमओ करनाल।
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