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जलवायु परिवर्तन से फसलों को नुकसान, बढ़ी वैज्ञानिकों की चिंता

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Damage to crops due to climate change, increased scientists' concern
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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। देश की कुल लवणग्रस्त 6.74 मिलियन हेक्टेयर भूमि में से 2.14 मिलियन हेक्टेयर को सुधार लिया गया है, अभी 4.60 मिलियन हेक्टेयर भूमि में सुधार का कार्य चल रहा। लेकिन वैज्ञानिकों की बड़ी चिंता जलवायु परिवर्तन की है। तेजी से परिवर्तित हो रही जलवायु के बीच फसलों के बेहतर उत्पादन को बरकरार रखना बड़ी चुनौती है। यह चिंता बुधवार को केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान में राष्ट्रीय जलवायु समुत्थान कृषि में नव प्रवर्तन (निकरा) की दो दिवसीय विशेषज्ञ समिति की समीक्षा बैठक में सामने आई। 14 से अधिक राष्ट्रीय संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने अपनी उपलब्धियों को साझा किया। इसमें स्पष्ट कहा गया कि हमें ऐसी अधिकतम तापमान सहन करने वाली किस्मों और प्रबंधन तकनीक पर काम करना होगा।
सीएसएसआरआई के निदेशक डॉ. प्रबोध चंद्र शर्मा ने कहा कि देश में इस समय 6.74 मिलियन हेक्टेयर मिट्टी लवणग्रस्त है। जिसमें संस्थान ने अब तक 2.14 मिलियन हेक्टेयर भूमि का सुधार किया है।
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डॉ. वेंक्टेशवर्लु ने कहा कि जलवायु परिवर्तन बागवानी फसलों में कम पैदावार व नुकसान का मुख्य कारण बन चुका है, इसलिए नई तकनीक विकसित करना और सिमुलेश प्रारूप से नुकसान का अनुमान लगाना समय की आवश्यकता है। मृदा में कार्बन को बढ़ाने के लिए बागवानी फसलों की मुख्य भूमिका है और इस पर अधिक शोध की आवश्यकता है।
सह अध्यक्ष एवं उप-महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंध) डॉ. एसके चौधरी ने वैज्ञानिकों से जैविक और अजैविक स्ट्रैस का नियंत्रण करने के लिए नई रणनीति बनाने का आह्वान किया। उन्होंने जल की बचत, मिट्टी का कार्बन बढ़ाने पर बल दिया। भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलुरू के प्रो. डॉ. नागेश कुमार ने शेयर्ड सामाजिक आर्थिक पाथवेज को सिमुलेशन के प्रारूप में लाने के महत्व के बारे में बताया।
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टमाटर-प्याज और मिर्च जैसी फसलों पर होगा अनुसंधान
तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एन. कुमार ने टमाटर-प्याज और मिर्च जैसी फसलों पर अनुसंधान व जलवायु परिवर्तन का नुकसान कम करने पर जोर दिया। सीआरआईडीए के निदेशक डॉ. वीके सिंह ने बागवानी और सिमुलेशन प्रारूप की उपलब्धियों के बारे में बताया। निकरा के इंचार्ज डॉ. एम. प्रभाकर बैठक में शामिल होने पहुंचे। सभी संस्थानों के वैज्ञानिकों की उपलब्धियों को एक साथ रखा। बैठक में सीएसएसआरआई करनाल के सभी प्रमुख वैज्ञानिक शामिल रहे।
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