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साइबर ठगों का जाल : असली से पहले नियम 134ए का नकली पोर्टल शुरू

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जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को प्राइवेट स्कूल में निशुल्क शिक्षा के लिए सरकार की ओर से नियम 134-ए के तहत दाखिले दिए जाते हैं। इस बार अभी तक शिक्षा विभाग की ओर से इस नियम के तहत दाखिले का शेड्यूल जारी नहीं किया गया है। ऐसे में पोर्टल बंद है, जबकि हर साल इन दिनों में पोर्टल चल जाता था। वहीं विभाग की इस लेटलतीफी का फायदा उठाते हुए असली से पहले नियम 134-ए का नकली पोर्टल शुरू हो गया है। इस पर काफी अभिभावकों ने दाखिले के लिए आवेदन तक कर डाला, लेकिन किसी ने यह पता नहीं किया कि विभाग की ओर से शेड्यूल जारी किया गया है या नहीं। पोर्टल के नकली होने का भी उन्हें अंदेशा तब हुआ, जब आवेदन फार्म में मोबाइल नंबर, आधार कार्ड नंबर, फोटो और आय डिटेल आदि जानकारी भरने के बाद जैसे ही पेज को सबमिट किया तो पोर्टल बंद हो गया। करनाल के कई अभिभावकों के साथ ऐसा हुआ है। इसके बाद शिक्षा विभाग में लोगों ने शिकायतें दी। अधिकारियों ने साइबर ठगों की साजिश का अंदेशा जताते हुए मुख्यालय में रिपोर्ट भेजी है।
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छह मार्च से भरे जा रहे थे निशुल्क फार्म
सरकारी नेटवर्क डॉट कॉम नाम के पोर्टल पर भी नियम 134-ए के फार्म भरने का लिंक दिया गया है। इस लिंक पर दी जानकारी के अनुसार, छह मार्च से नियम 134-ए के तहत दाखिला प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आवेदन फार्म की कोई फीस नहीं है। सामान्य निर्देशों के कॉलम में लिखा है कि फार्म सबमिट करने के उपरांत डिटेल बदली नहीं जाएगी। बोर्ड और अन्य जानकारी सही देनी होगी। अंत में यह भी कहा गया है कि फार्म को चेक करने के बाद सबमिट करना न भूलें।
कोरोना के कारण पिछले साल रुक गई थी प्रक्रिया...
नियम 134-ए के तहत हर साल हजारों विद्यार्थी दाखिले के लिए आवेदन करते हैं। एक सीट पर करीब पांच विद्यार्थी दाखिले की दौड़ में होते हैं। गत वर्ष नियम 134-ए की प्रक्रिया सुचारु चल रही थी। 24 मार्च तक प्रवेश परीक्षा भी आयोजित हो चुकी थी, लेकिन लॉकडाउन लगने के कारण न तो परीक्षा परिणाम जारी हुआ और न ही नियम के तहत विद्यार्थियों को दाखिले दिए गए। ऐसे में प्रवेश परीक्षा बीच में ही रुक गई थी। इसलिए इस बार अभिभावकों में नियम के तहत दाखिले को लेकर क्रेज ज्यादा है।
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वर्जन-
हो सकता है साइबर ठगी के लिए नकली पोर्टल शुरू हुआ : डीईईओ
शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक नियम 134-ए का कोई शेड्यूल जारी नहीं किया गया है। कई लोगों की मेरे पास व्यक्तिगत रूप से और कुछ लोगों की बीईओ के माध्यम से शिकायत आई है। साइबर ठगों का यह ठगी के लिए नया तरीका हो सकता है। अभिभावक विभाग के निर्देश जारी होने से पहले किसी भी पोर्टल पर आवेदन फार्म न भरें। हमने मुख्यालय को स्थिति से अवगत करा दिया है। -रोहताश वर्मा, डीईईओ करनाल।
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