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गेहूं खरीद पर सरकार और आढ़ती आमने-सामने

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आढ़तियों की ओर से गेहूं खरीद बहिष्कार का दूसरे दिन भी असर दिखा। अधिकांश अनाज मंडियों में आढ़तियों ने गेहूं खरीद में सहयोग नहीं किया। वहीं करनाल अनाज मंडी में दूसरे गुट के जो आढ़ती खरीद करना चाहते थे, उन्हें लेबर नहीं मिल सकी। ऐसे में शुक्रवार को कम ही खरीद हुई। वहीं करनाल अनाज मंडी में एक गुट द्वारा खरीद शुरू करने के बाद एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष अशोक गुप्ता सहित कई प्रांतीय पदाधिकारी दिनभर अनाज मंडी में डटे रहे और दूसरे गुट के साथ बैठक करके उन्हें मनाते रहे, लेकिन दूसरे गुट ने पत्ते नहीं खोले और बाद में बैठक कर कोई निर्णय लेने की बात कही। ऐसे में अनाज मंडी में दिनभर तनाव जैसी स्थिति रही। देर शाम को कई किसानों का धैर्य टूट गया और उन्होंने स्वयं लेबर का काम करते हुए खरीद एजेंसियों को अपना गेहूं बेचना शुरू कर दिया है। जिलेभर में शाम तक 4272 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो सकी।
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हरियाणा अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष अशोक गुप्ता, राज्य उप प्रधान धर्मबीर मलिक, कोषाध्यक्ष बिट्टू कालड़ा, राजेंद्र सिंह, सतपाल सिंह आदि कई प्रांतीय नेता शुक्रवार को चेयरमैन रजनीश चौधरी के कार्यालय पहुंचे। यहां आढ़तियों के साथ गेहूं खरीद बहिष्कार को सफल बनाने पर मंथन किया गया। इसके बाद दूसरे गुट के मंडी प्रधान धर्मबीर पाढ़ा की दुकान पर जाकर भी बैठक की गई। आढ़तियों को बहिष्कार में शामिल होकर खरीद कार्य को बंद करने के लिए मनाने का हर संभव प्रयास किया गया लेकिन धर्मबार पाढ़ा व रामपाल ढाकला आदि नेताओं ने साथियों के साथ बैठक करके ही कोई निर्णय लेने की बात कही। साथ ही गेहूं खरीद करते रहे, लेकिन जब आढ़ती एसोसिएशन ने भारतीय मजदूर संघ के प्रधान राम कुमार महतो पर दबाव बनाया तो लेबर ने कार्य बंद कर दिया, जिससे यहां गेहूं की खरीद काफी हद तक थम गई, लेकिन खाद्य एवं आपूर्ति विभाग व डिपो होल्डर्स की लेबर से खरीद जारी रखी गई।
हरियाणा राज्य की 22 मंडियों में नहीं खरीद बहिष्कार का असर
प्रदेशभर की 115 बड़ी मंडियों सहित उप मंडियों व पर्चेज सेंटर सहित करीब 380 छोटी बड़ी अनाज मंडियां है। आढ़ती सूत्रों के मुताबिक रेवाड़ी, पलवल, नारनौल सहित 22 बड़ी मंडियों में गेहूं बहिष्कार का असर नहीं दिख रहा है। हालांकि प्रदेशाध्यक्ष अशोक गुप्ता ने दावा किया कि हरियाणा की सभी अनाज मंडियों में आढ़तियों द्वारा गेहूं खरीद का बहिष्कार किया गया है। कुछ मंडियों में 15 दिन पहले ही सीजन शुरू हो जाता है, वहां इस समय गेहूं नहीं है, लेकिन वह भी एसोसिएशन के साथ हैं।
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जब किसान ही गेहूं नहीं बेच रहे तो कैसे खरीदें
जिला प्रशासन ने 180 डिपो होल्डर्स को खरीद का अस्थायी लाइसेंस जारी तो किया है लेकिन अभी तक इन डिपो होल्डर्स ने खरीद शुरू नहीं की है। करनाल अनाज मंडी में 35 डिपो होल्डर्स को लाइसेंस दिया गया है। मार्केट कमेटी के सचिव सुरेंद्र सिंह ने बताया कि डिपो होल्डर्स तो हमारी अतिरिक्त व्यवस्था है। यहां तो सभी खरीद एजेंसियां ही लगातार गेहूं खरीद के लिए सक्रिय हैं, लेकिन जब किसान ही गेहूं बेचने से इनकार कर रहे हैं तो जबरन गेहूं कैसे खरीदा जाए। जो किसान गेहूं बेच रहे हैं, उनकी फसल खरीदी जा रही है। भुगतान भी सीधे खातों में किया जा रहा है।
75 प्रतिशत किसानों की मर्जी से लिया गया सीधे भुगतान का निर्णय : एसीएस
प्रदेश की सभी मंडियों में ए-श्रेणी अफसरों की देखरेख में हो रही है खरीद
एसीएस देवेंद्र सिंह ने करनाल अनाज मंडी का किया दौरा, खरीद व्यवस्था देखी
करनाल। गेहूं खरीद व्यवस्थाओं को चुस्त दुरुस्त रखने के लिए सरकार के बड़े अफसरों ने भी अनाज मंडियों का रुख कर लिया है। हरियाणा सरकार का पूरा ध्यान अधिकाधिक गेहूं खरीदने पर है। इसके तहत जन स्वास्थ्य एवं सिंचाई विभाग के अतिरिक्त प्रधान सचिव देवेंद्र सिंह शुक्रवार को करनाल पहुंचे। उन्होंने कहा कि मंडियों में किसी भी किसान को दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। 75 प्रतिशत किसानों ने अपने खाते में भुगतान चाहा है, इसलिए सरकार किसानों के खाते में ही सीधे भुगतान करेगी।
उन्होंने कहा कि पिछले साल 55 फीसदी किसानों ने अपने खातों में भुगतान पर सहमति जताई थी, लेकिन इस बार करीब 75 प्रतिशत किसान फसल का सीधा भुगतान अपने खातों में चाहते हैं। उन्होंने किसानों से अनुरोध किया कि जो भी लेनदेन आढ़तियों के साथ है, खाते में पेमेंट आने के बाद वे आढ़तियों का हिसाब कर दें। आपसी भाईचारा बनाकर रखें। जब किसान आढ़तियों पर भरोसा करते आए हैं तो आढ़तियों को भी किसानों पर भरोसा करना चाहिए। उन्होंने सीधे किसानों से पूछा कि वह सीधा भुगतान मिलने से खुश हैं तो कई किसानों ने खुशी का इजहार किया। वहीं व्यवस्था ठीक है के सवाल पर खामोश रहे।
उन्होंने ढेरियों पर जाकर नमी की जांच कराई। उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने एसीएस को बताया कि जिले की मंडियों में किसानों का सहयोग मिल रहा है। जिला की सभी मंडियों में खरीद व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है। अधिकारी गेहूं खरीद पर नजर बनाए हुए हैं। इस मौके पर जिला गेहूं खरीद की नोडल एडीसी वीना हुड्डा, एसडीएम करनाल आयुष सिन्हा, डीएफएससी निशांत राठी, डीएमईओ ईश्वर राणा व खरीद एजेंसियों के अधिकारी मौजूद रहे।
किसानों की फसल हर दाना खरीदा जाएगा
-प्रदेश के सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसानों की फसल का एक-एक दाना खरीदा जाए। समय पर खरीद हो और तोल में कोई कोताही न हो, समय रहते फसल का उठान किया जाए ताकि मंडी में भीड़ न हो। गेहूं खरीद का भुगतान सीधे किसानों के खाते में ही किया जाएगा। करनाल मंडी में अब तक 20 हजार टन गेहूं की आवक हो चुकी है। 12 हजार क्विंटल खरीद हो गई है।
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-देवेंद्र सिंह,अतिरिक्त प्रधान सचिव
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