सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मृत बच्ची पैदा होने पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया। इसके साथ ही ग्रामीणों ने महिला डॉक्टर को निलंबित किए जाने की भी मांग की। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने परिजनों को शांत कराया।
गांव अराईपुरा निवासी अमर सिंह अपनी गर्भवती पत्नी सोनिया को घरौंडा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डिलीवरी के लिए लेकर आया था। डिलीवरी में महिला को मृत बच्ची पैदा हुई। आरोप है कि परिजनों द्वारा महिला डॉक्टर से बच्ची के मृत होने का कारण पूछने पर महिला डॉक्टर ने अभद्र व्यवहार किया। इससे परिजन गुस्सा हो गए और उन्होंने अस्पताल में जमकर बवाल काटा।
मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और ग्रामीणों को शांत किया। उधर, इस बारे में एसएमओ कुलबीर सिंह ने बताया कि अराईपुरा की महिला को मृत बच्ची होने का मामला उनके संज्ञान में आया हैं। इसकी सूचना उन्होंने सीएमओ करनाल को कर दी हैं और पर्ची पर तारीख मिटाने आदि की उनके पास कोई शिकायत नहीं आई हैं। पूरे मामले की जांच रही है।
महिला डॉक्टर पर लापरवाही का लगाया आरोप
पीड़ित महिला सोनिया के पति अमर सिंह ने बताया कि उसकी पत्नी सोनिया की यह पहली डिलीवरी थी। इसको लेकर 28 दिसंबर को उन्होंने सोनिया का चेकअप घरौंडा सरकारी अस्पताल में कराया था। फिर 9 जनवरी को दोबारा उन्होंने सोनिया के स्वास्थ्य की जांच करवाई। इसमें महिला डॉक्टर ने उन्हें महिला व बच्चे के स्वस्थ होने की बात कही थी। इसके साथ ही 22 जनवरी के आसपास डिलीवरी होने को कहा।
लेकिन बुधवार की देर रात को सोनिया को दर्द शुरू हो गया तो उसने तुरंत सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया और डिलीवरी करवाई तो डॉक्टर ने बताया कि उनकी पत्नी को मृत बच्ची हुई है। अमर सिंह का आरोप है कि महिला डॉक्टर की लापरवाही के कारण ही उनकी बच्ची की मौत हुई हैं, क्योंकि महिला डॉक्टर ने 9 जनवरी को उनकी पत्नी व बच्चे का चेकअप किया था और चेकअप में दोनों के स्वस्थ होने की पुष्टि की गई थी, जब दोनों स्वस्थ थे तो अब बच्ची की मौत कैसे हो सकती है?
क्या कहती हैं महिला डॉक्टर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की महिला डॉक्टर रीमा का कहना है कि 28 दिसंबर को सोनिया का चेकअप किया गया था। जिसमें सोनिया का ब्लडप्रेशर ज्यादा था और उन्हें करनाल रेफर कर दिया था। लेकिन सोनिया के परिजन 9 जनवरी को फिर सोनिया को लेकर अस्पताल में आ गए थे और उस दिन स्टाफ नर्स ने उनका चेकअप किया। आज जब सोनिया को दर्द होने पर उसके परिजन दोबारा अस्पताल लेकर आए तो चेकअप करने से पता चला कि बच्चे में धड़कन नही हैं, तो सोनिया कि डिलीवरी की गई, जिसमें सोनिया को मृत बच्ची हुई। डॉक्टर का मानना हैं कि बच्ची करीब दो व तीन दिन से मृत थी।
नहीं किया था रेफर, गलती छुपाने की कोशिश
पीड़ित महिला के परिजन ने बताया कि 28 तारीख को सोनिया के चेकअप के दौरान महिला डॉक्टर रीमा ने उन्हें रेफर करने की कोई बात नहीं कही और न ही पर्ची पर लिखा। उन्होंने बताया कि किसी डॉक्टर या नर्स ने आज ही अपनी गलती छुपाने के लिए 9 जनवरी की चेकअप पर्ची पर लिखी तारीख को मिटाने की कोशिश की और उसी पर्ची पर रेफर लिख दिया, क्योंकि 9 जनवरी की चेकअप पर्ची की फोटो कापी उनके पास हैं, लेकिन उसमें रेफर नहीं लिखा हुआ हैं।