अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
प्रदेश के राज्यमंत्री एवं करनाल ग्रीवेंसिज कमेटी के चेयरमैन नायब सिंह सैनी द्वारा 24 मई को करनाल की जिला मौलिक शिक्षा व क्लर्क राजेश कुमार को सस्पेंड करने के मामले में पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सरोज बाला व क्लर्क ने वकील एसके नेहरा के माध्यम से हाईकोर्ट में गुहार लगाते हुए दलील दी थी कि ग्रीवेंसिज मंत्री को सस्पेंड करने का कोई अधिकार नहीं है। न्यायालय ने इस मामले में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सरोज बाला व क्लर्क राजेश कुमार को फौरी राहत देते हुए स्टे दे दिया है। इसके साथ ही इस मामले में प्रदेश के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, डायरेक्टर सेकेंडरी एजुकेशन, डीसी करनाल, एसडीएम करनाल, प्रदेश के श्रम एवं रोजगार मंत्री नायब सिंह सैनी व अध्यापक राजकुमार बहल को नोटिस जारी किया है।
बता दें कि सप्ताह भर पहले ही 24 मई को करनाल ग्रीवेंसिज कमेटी की बैठक में यह मामला सामने आया था। गांव चमारखेड़ा में साइंस टीचर के पद पर कार्यरत अध्यापक राजकुमार बहल ने कमेटी में शिकायत करके बताया था कि उन्होंने सितंबर, 2018 में एलटीसी के लिए आवेदन किया था लेकिन, उन्हें एलटीसी जारी नहीं की गई। साइंस टीचर राजकुमार बहल ने ये भी शिकायत की थी कि उन्हें जानबूझ कर परेशान किया गया। 24 मई से पिछली बैठक में इस मामले को लेकर तीन सदस्यीय जांच कमेटी बना दी गई थी। इस जांच कमेटी में एसडीएम के अलावा ग्रीवेंसिज कमेटी के सदस्य सरदार दर्शन सिंह सहगल व एक एडवोकेट शामिल थे। इस जांच कमेटी ने 24 मई को ग्रीवेंसिज कमेटी की बैठक में मंत्री नायब सिंह सैनी के सामने मामला रखा और एलटीसी जारी न करने के लिए क्लर्क व जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सरोज बाला को जिम्मेदार ठहराया। इस पर कार्रवाई करते हुए कमेटी के चेयरमैन प्रदेश के श्रम एवं रोजगार मंत्री नायब सिंह सैनी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सरोज बाला और क्लर्क राजेश कुमार को सस्पेंड करने के निर्देश जारी कर दिए थे। हालांकि, साइंस टीचर राजकुमार को 19 मई को ही एलटीसी की किश्त मिल गई थी। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में कई ऐसे फैसले दिए हैं, जिसमें बताया गया है कि मंत्री इस तरह से किसी को निलंबित करने के आदेश पारित नहीं कर सकते हैं। बहरहाल जस्टिस राजीव नरैन रैना की अदालत ने सरोज बाला और राजेश कुमार को हाईकोर्ट स्टे दिया है?