अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड को लेकर मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रात को अल्ट्रासाउंड न होने के कारण एक पति अपनी गर्भवती पत्नी को रातभर शहर में अल्ट्रासाउंड के लिए घूमता रहा, लेकिन उसकी पत्नी का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया और सुबह उसकी पत्नी की डिलीवरी कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में हुई तो उसे मृत बच्चा हुआ।
महिला के पति सुरिंद ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की लागत से बने मेडिकल कॉलेज में रात को अल्ट्रासाउंड कराने की व्यवस्था ही नहीं है। उसने मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है। सुरिंद्र ने बताया कि रात को इंद्री से उसकी पत्नी सुंदरा को रेफर कर दिया गया, क्योंकि उसकी पत्नी के गर्भ में पल रहे बच्चे की धड़कन बंद थी। वह उसे रात को मेडिकल कॉलेज में लेकर आया तो यहां पहले तो उसकी पत्नी को एडमिट नहीं किया। एडमिट करने के बाद उसे कहा कि अल्ट्रासाउंड कराकर लाओ। मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था न होने पर वह बाहर दूसरे अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए भटकता रहा, लेकिन उसकी पत्नी का अल्ट्रासाउंड नहीं हुआ। इसके बाद सुबह उसकी पत्नी की डिलीवरी हुई तो डॉक्टरों ने मृत बच्चा उसके हाथों में थमा दिया। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के डीएमएस डॉ. मुनीष परुथी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड की दो मशीनें हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाले रेडियोलॉजिस्ट की संख्या भी दो ही है। जो दिन हमें ही अल्ट्रासाउंड करते हैं। इसलिए रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण मेडिकल कॉलेज में रात को अल्ट्रासाउंड नहीं होते। सुरिंद्र की पत्नी रात को करीब सवा दो बजे आई थी। उस दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे की धड़कन चेक की थी, तो बच्चे में धड़कन नहीं थी। अल्ट्रासाउंड बोला गया था, ताकि पता चल सके कि बच्ची की धड़कन कब से बंद है। डॉक्टरों पर लापरवाही के लगाए गए आरोप निराधार हैं।