संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले के करीब दो हजार मेडिकल स्टोरों को दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए किसी भी प्रकार का कफ सिरप नहीं देने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। ये प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा जब तक कफ सिरप के संबंध में जांच पूरी नहीं हो जाती। मेडिकल स्टोरों में यदि दो साल से कम उम्र के बच्चों को दिया जाने वाला कफ सिरप मिलता है तो स्टॉक जब्त कर लिया जाएगा।
जिले की कफ सिरप बनाने वाली फैक्टरियों में जो सिरप तैयार किए जा रहे हैं, उनमें इस्तेमाल होने वाले पीजी (प्रोपलीन ग्लाइकॉल) सॉल्वेंट की गुणवत्ता और मात्रा की जांच के बारे में जिले में दवा नियंत्रण विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। जिला औषधि नियंत्रक टीम ने बुधवार को करनाल की पांच दवा फैक्टरियों के रिकॉर्ड खंगाले। टीम ने करनाल के सेक्टर-3 स्थित स्टेनकैम बायोलाइफ और कॉमेक्स फार्मा प्राइवेट लिमिटेड फैक्टरी में कफ सिरप से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की। पानीपत, हिसार और गुरुग्राम से आई ड्रग कंट्रोल अधिकारियों की टीमों ने सेक्टर की दो अन्य फैक्टरियों और कुंजपुरा क्षेत्र की एक यूनिट में दस्तावेज की जांच की।
टीमों ने सिरप निर्माण, परीक्षण, पैकिंग और बिक्री से जुड़ी फाइलों व स्टॉक रिकॉर्ड को बारीकी से परखा। जिला औषधि नियंत्रक टीम ने कफ सिरप में पीजी कितनी मात्रा का इस्तेमाल हुआ कहां से टेस्ट कराया, कितना कफ सिरप तैयार किया गया, कितना बेचा गया, क्या सावधानियां बरतीं, उत्पादन इस्तेमाल होने वाले सभी रसायनों की रिकॉर्ड जांच की गई। हालांकि, जांच में किसी भी फैक्टरी में रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं पाई गई। न ही किसी फैक्टरी में दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सिरप बनाए जाने का रिकॉर्ड मिला।
हिसार डीसीओ ऋतु मेहला ने कुंजपुरा स्थित मैगनस बायोटेक एवं फार्मास्यूटिकल में, पानीपत डीसीओ पवन कुमार ने सेक्टर-3 में स्थित सार्थक बॉयोटेक प्राइवेट लिमिटेड और गुड़गांव डीसीओ मुकेश कुमार ने सेक्टर-3 स्थित आईकॉन हेल्थेकेयर कफ सिरप बनाने वाली फैक्टरी की जांच की। सभी फैक्टरियों में स्टॉक शून्य पाया गया।
सिरप के विकल्प के बारे में निर्देश नहीं
कफ सिरप के बदले दो साल से कम उम्र के बच्चों को क्या वैकल्पिक उपचार दिया जाए। इस बारे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। कई चिकित्सकों ने घरेलू और अन्य चिकित्सकीय उपचार करने की सलाह दी है। नागरिक अस्पताल से बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुनीष प्रुथी का कहना है कि घर पर भाप दे सकते हैं। शहद और आयुर्वेदिक दवाओं से भी उपचार दिया जा सकता है।
क्या है पीजी
- जिला औषधि अधिकारी विकास राठी ने बताया कि पीजी (प्रोपलीन ग्लाइकॉल) घुलनशील रसायन होता है, जिसका उपयोग कई दवाओं और सिरप को घोलने या स्थिर रखने के लिए किया जाता है। सामान्य मात्रा में यह सुरक्षित माना जाता है, लेकिन अगर इसकी मात्रा अधिक हो जाए या गुणवत्ता मानक से कम हो, तो यह बच्चों के लीवर, किडनी और नर्वस सिस्टम पर असर डाल सकता है।
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फैक्टरियों में कार्रवाई मुख्य हेडक्वार्टर के निर्देश पर की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बाकी 10 फैक्टरियों पर भी अगले कई दिनों तक कार्रवाई जारी रहेगी। हेडक्वार्टर से टीम आकर जांच करेगी। -विकास राठी, जिला औषधि अधिकारी