पंचायत भवन में एससीएसटी आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह ने अनुसूचित जाति से जुड़े लोगों के 23 मामलों की सुनवाई करते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई। पुलिस की लापरवाही से गुस्साए सदस्य ने सदर थाना प्रभारी समेत एसपी करनाल को दिल्ली अपने कार्यालय में तलब होने के निर्देश दिया। इसके अलावा, सीटीएम सुधांशु गौतम को सही तरीके से केस को नहीं बता पाने पर खिंचाई की। एससीएसटी आयोग के सदस्य के तिलमिलाये रुख से अधिकारियों के सर्दी में भी पसीने छूटे रहे।
शुक्रवार दोपहर 12 बजे राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह पंचायत भवन में अनुसूचित जाति के लोगों की शिकायतें सुनने पहुंचे। पहले से तय दरबार में कुल 23 शिकायतें रखी गईं। ज्यादातर शिकायतें पुलिस के खिलाफ थी, वहीं कुछ मामले जिला प्रशासन से संबंधित रहे। लगातार पुलिस की शिकायत आने पर सदस्य ने अधिकारियों की जमकर खिंचाई की, साथ ही चेतावनी तक दे डाली। एक केस में समय पर रिपोर्ट नहीं भेजने पर सदर थाना प्रभारी प्रतीक कुमार को दिल्ली अपने कार्यालय में बुलाया, साथ ही यह भी कहा कि करनाल एसपी को भी दिल्ली बुलाया जाए। इसके साथ ही, महिला थाना की डीएसपी शकुंतला को आयोग सदस्य ने खरी-खरी सुनाई। सदस्य ने ज्यादातर मामलों को निपटाया, अनसुलझे केसों को लेकर उन्होंने अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की। इस मौके पर अतिरिक्त उपायुक्त प्रियंका सोनी, आयोग से अधिकारी आरके शर्मा, सीटीएम सुधांशु गौतम सहित प्रशासन के संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे।
शकुंतला मैडम, ये दफ्तर आपका नहीं, डीएसपी पद का है
क्या मेरा दफ्तर-मेरा दफ्तर कह रहे हो। आपका काम लोगों को दफ्तर से बाहर निकालने का नहीं है। अगर एक एफिडेविट लेकर दिल्ली आयोग में बुला लूंगा तो पता लग जाएगा दफ्तर क्या होता है? ये शब्द ईश्वर सिंह ने डीएसपी शकुंतला को एक शिकायत सुनने पर कहे। शिकायत लेकर पहुंचे दिलबाग सिंह ने बताया कि वह दिवाली के दिन घर जा रहा था तो कुछ लोगों ने उसको जाति सूचक शब्द कहे। इस पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। जव वह डीएसपी शकुंतला के पास जाता है तो वह उसकी बात नहीं सुनती और उसे अपने दफ्तर से बाहर निकाल देती है। इस पर आयोग के मेंबर ईश्वर सिंह ने डीएसपी शकुंतला को कहा कि वह क्यों बार-बार उसे दफ्तर से बाहर निकाल रही है? इस पर डीएसपी शकुंतला ने कहा कि उसके मामले की जांच की जा चुकी है। पुलिस उसमें कार्रवाई कर रही है। दिलबाग बार-बार आकर पूछता है कि क्या कार्रवाई की गई है? इससे उसके दफ्तर में आने वाले अन्य लोग भी परेशान होते हैं। इस पर ईश्वर सिंह ने कहा कि मैडम शकुंतला वो दफ्तर आपका नहीं है, वो डीएसपी का ऑफिस है। आप लोगों की समस्या के समाधान के लिए हो न कि उन्हें दफ्तर से बाहर निकालने के लिए हो। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच वह दूसरे डीएसपी से करवाएंगे। इस पर डीएसपी शकुंतला ने कहा जहां प्रार्थी को संतुष्टि हो वहां जांच करवा सकता है। मेंबर ने सख्ताई से कहा कि आप ये नहीं कह सकते कि मैं दोबारा से जांच करूंगी, ये बोल रहे हो किसी और से करवा लो।
सात महीने में आरोपी नहीं पकड़े गए, हद से पार है पुलिस का काम
औंगद गांव के राजिंद्र ने आयोग को शिकायत दी थी कि 18 मई को उसके बेटे की हत्या छह लोगों ने हत्या कर दी थी। पुलिस ने चार लोगों को तो अरेस्ट कर लिया, लेकिन दो आरोपी अभी भी फरार हैं। शिकायत पर आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह ने डीएसपी विवेक चौधरी से पूछा कि जो शिकायतकर्ता कह रहा है। वह ठीक है। डीएसपी ने कहा इस मामले में चार को गिरफ्तार कर लिया है। दो अभी फरार है। इस पर आयोग के सदस्य ने कहा कि सात माह बीत जाने के बाद भी पुलिस दो आरोपियों को पकड़ नहीं सकी। यह काम तो पुलिस का हद से पार है। आयोग ने डीएसपी रामकुमार को आदेश दिए कि दो सप्ताह में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। इसके बाद उन्होंने पीड़ित को कहा कि अगर दो सप्ताह में आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए तो उन्हें बताएं।
पहले लगाई फटकार, फिर सराहा
किशना वासी मदनपुर डेरा ने आयोग के सदस्य को रोते हुए अपनी व्यथा सुनाई कि एक दबंग किस्म का व्यक्ति उनके डेरे से गुजरता है। पुलिस को शिकायत भी दी, लेकिन पुलिस कोई सुनवाई नहीं कर रही। इस पर सदर थाना प्रभारी प्रतीक कुमार ने बताया कि मामले की जांच की गई है। आयोग को रिपोर्ट भेज दी है। इस पर आयोग के सदस्य ने कहा कि उन्होंने रिपोर्ट एक दिन पहले भेजी है, जोकि एक सप्ताह पूर्व भेजनी थी। इस पर उन्होंने डीएसपी को मामले की जांच करने के आदेश दिए। उन्होंने आयोग के अधिकारी को कहा कि थाना प्रभारी को एसपी सहित दिल्ली बुलाओ। बैठक के बाद आयोग के सदस्य ने थाना प्रभारी की काफी तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि थाना प्रभारी अच्छे है। काम भी ठीक किया है। बस रिपोर्ट लेट भेजी है। यह सप्ताह पूर्व भेजनी थी।
मेरे फेसबुक पर पांच हजार फ्रेंड है, मां-बाप से तीन साल से बोलचाल बंद है
सेक्टर-9 वासी पवन ने आयोग को शिकायत दी थी कि उसका और उसके पिता का पारिवारिक झगड़ा है। मामले में एसआई विक्रांत ने उसे गाली दी और जातिसूचक शब्द कहे। इस पर आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह ने कहा कि तेरा तो वह हाल है कि मेरे फेसबुक पर पांच हजार फ्रैंड है, लेकिन मां बाप से तीन साल से बोलचाल बंद है। उन्होंने पवन को कहा कि जिस मां बाप ने जन्म दिया और इतना बढ़ा किया उनकी इज्जत करना सीखों। किसी की शिकायत देना उसके बाद का काम है।
हर पांच मिनट बाद पूछा एसपी नहीं आए अभी तक
आयोग सदस्य ने शिकायतें सुनने के दौरान बार-बार डीएसपी राजकुमार से पूछा कि एसपी नहीं पहुंचे। डीएसपी राजकुमार एसपी को फोन करते रहे। बैठक खत्म होने तक एसपी बैठक में नहीं पहुंच पाए। हर पांच मिनट बाद सदस्य पूछते रहे कि एसपी क्यों नहीं पहुंचे। पुलिस अधिकारी यही बात कहते रहे कि आ रहे है। उसके बाद फिर पूछ लिया गया कि अभी पहुंचे नहीं क्या। दोपहर दो बजे बैठक खत्म हो गई, लेकिन एसपी नहीं पहुंच पाए।