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Karnal News: प्रशिक्षक रमन ने दौड़ में झटका स्वर्ण पदक

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- नई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित खेलो इंडिया पैरा गेम्स में पाया मुकाम
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मुकेश राणा
करनाल। नई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में चल रहे प्रथम खेलो इंडिया पैरा गेम्स में करनाल के कर्ण स्टेडियम के प्रशिक्षक रमन शर्मा ने 1500 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया है। इससे पहले रमन शर्मा ने चीन के हांगझोऊ में आयोजित पैरा एशियाई खेलों में 1500 मीटर टी-38 (दिव्यांगता कैटेगिरी) दौड़ को करीब सवा चार मिनट में पूरा कर स्वर्ण पदक जीता था।
मौजूदा समय में रमन कर्ण स्टेडियम में जूनियर एथलेटिक्स कोच के पद पर तैनात हैं। मूक बधिर होने के साथ-साथ उनके दोनों हाथ और पैर भी सामान्य नहीं हैं। उनके पिता कमांडो कॉम्पलेक्स में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। रमन पिछले चार सालों से एथलेक्टिक्स कोच होेने के साथ-साथ निरंतर कड़ी मेहनत कर रहे हैं। वह करनाल और रोहतक में अभ्यास करते हैं।
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मूलरूप से रमन जींद के गांव ईगराह के रहने वाले हैं, लेकिन पिता की डयूटी करनाल स्थित कमांडो कॉम्पलेक्स नेवल में हाेने के कारण पूरा परिवार यहीं पर रहता है। ओपीएस इंटरनेशल स्कूल से 12वीं पास करने के बाद रमन ने हारट्रोन से कंप्यूटर कोर्स भी किया है। इसके अलावा उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से बीए की परीक्षा पास की है। बचपन से ही रमन की खेलों में रुची रही है, लेकिन बोलने में असमर्थ होने के कारण वह आम बच्चों के साथ तालमेल नहीं बिठा पाते थे।

2016 से की खेल की शुरुआत
माता-पिता के कहने पर रमन ने 2016 से पैरा गेम्स में हिस्सा लेना शुरू किया। कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने अपने पहले पैरा स्टेट गेम्स में प्रथम स्थान प्राप्त किया। जिसके दम पर उनका चयन पैरा नेशनल गेम्स के लिए हुआ। 2017 में जयपुर में आयोजित 17वीं नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रमन ने 400 मीटर रेस में स्वर्ण, 800 मीटर व 100 गुणा चार रिले दौड़ में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। रमन ने 2018 के पैरा गेम्स में तीन स्वर्ण पदक जीते। इंडोनेशिया में आयोजित पैरा एशियाई गेम्स में 400 मीटर दौड़ में एशिया में छठा स्थान हासिल किया। 2020 नेशनल चैंपियनशिप में दो स्वर्ण व एक रजत पदक प्राप्त किया। 2021 में भी दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। 2022 के नेशनल चैंपियनशिप में भी दो स्वर्ण व एक रजत, 2023 के बंगलुरु में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप की 1500 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक प्राप्त किया।

मामा से मिली प्रेरणा
रमन के पिता जयवीर शर्मा ने बताया कि बचपन में रमन को पैरा गेम्स में खेलने के लिए उनके मामा राजेश शर्मा ने प्रेरित किया था। उनके कहने पर उन्होंने विचार किया और बेटे को खेलने के लिए मैदान में उतारा। रमन को उनके प्रशिक्षक डॉ. रमेश सिंधू ने खेल की बारीकियों से अवगत करवाया और उन्हें कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।
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खेल के दम पर मिली नौकरी
28 वर्षीय रमन को उनके खेल के दम पर जूनियर एथलेटिक्स प्रशिक्षक के रूप में नौकरी मिली है। 2018 के पैरा एशियन गेम्स में बेहतर उपलब्धि को देखते हुए वर्ष 2022 में रमन को खेल विभाग की ओर से सौगात दी गई। माता सुनीता देवी व पिता जयवीर को अपने बेटे की उपलब्धि पर नाज है। जिन्होंने दिव्यांगता को अपनी मजबूरी नहीं बल्कि अपनी ताकत बनाया है।
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