- नोटिस जारी, संपत्ति अटैच कर कुर्क करने की चेतावनी
- शहर के 202 शहरी संपत्तिधारकों पर 140 करोड़, 56 सरकारी संस्थानों, विभागों पर 220 करोड़ बकाया
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। नगर निगम ने शहर के पांच लाख से ऊपर के 202 संपत्ति कर बकायेदारों को नोटिस जारी कर दिया है। इन पर 140 करोड़ रुपये का संपत्ति कर बकाया है। इन्हें बकाया संपत्ति जमा करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद उनकी संपत्ति को अटैच कर कुर्क करने की चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही 220 करोड़ रुपये के 56 बकायेदार केंद्रीय व राज्य सरकार के संस्थानों, विभागों को भी नोटिस जारी किया गया है।
नगर निगम करनाल ने पिछले साल नई संपत्ति कर आईडी को लागू किया। इसी साल की शुरुआत में असिस्मेंट नोटिस जारी करके 1.44 लाख संपत्तियों के स्थान पर 1.66 लाख संपत्तियां हो गईं। संपत्तियों के नामों, मोबाइल फोन नंबरों आदि कई तरह की त्रुटियों को लेकर संपत्तिधारक जूझते रहे। फिर नगर निगम ने घर-घर जाकर संपत्तियों को दुरुस्त कराने का टेंडर दिया। ये कार्य अभी चल रहा है। अब जो असिस्मेंट नोटिस जारी किए गए थे, उन पर नए साल में लोग अपना संपत्ति कर जमा करेंगे, लेकिन संपत्ति धारकों पर अभी पुराना बकाया ही करीब 360 करोड़ रुपये है। जिसकी वसूली के लिए अब नगर निगम ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है, क्योंकि ये बड़ी धनराशि हैं, जिससे शहर के कई विकास कार्य हो सकते हैं।
नगर निगम की कर शाखा के अधिकारियों ने बताया कि एक से पांच लाख रुपये तक के बकायेदारों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब पांच लाख रुपये से ऊपर के 202 बकायेदार संपत्तिधारकों को नोटिस जारी कर दिया गया है। जिसमें हिदायत दी गई है कि वह नोटिस मिलने के 30 दिनों के अंदर बकाया धनराशि जमा कर दें। अन्यथा उनकी संपत्ति को निगम से संबंध करने के बाद कुर्की की कार्यवाही शुरू की जा सकती है। 31 दिसंबर तक सरकार की योजना के मुताबिक ब्याजमाफी भी दी जा रही है, मार्च तक के बकायेदारों को एक मुश्त भुगतान पर अतिरिक्त छूट भी दी जा रही है।
बरती जाएगी सख्ती
कर शाखा के अधिकारियों ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में केंद्र सरकार के छह व राज्य सरकार के 50 संस्थानों व विभागों के कार्यालयों पर करीब 220 करोड़ रुपये का संपत्ति कर बकाया है। इन सरकारी बकायेदारों को भी नोटिस जारी किया गया है। निगमायुक्त अभिषेक मीणा ने इन संस्थानों व विभागों के अधिकारियों के साथ बातचीत भी शुरू कर दी है, जिससे वह अपने संस्थानों व विभागों के मुख्यालयों में पैरवी करके नगर निगम की बकाया राशि का शीघ्र भुगतान कर सके। इसके लिए सख्ती भी की जाएगी।