पोर्टल में चल रही खामियों से परेशान किसानों ने सोमवार को करनाल मंडी पहुंचे सीएम के समक्ष गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि कई-कई दिनों से मंडी में किसान पड़े हैं, लेकिन पोर्टल की खामी से उन्हें गेटपास नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने किसानों की समस्याओं का हवाला देते हुए पोर्टल को बंद करने की मांग उठाई। इस पर सीएम ने कहा कि पोर्टल किसानों की भलाई और गड़बड़ी रोकने के लिए है। इसे बंद नहीं किया जाएगा, बल्कि जब तक सिस्टम ठीक नहीं हो जाता तब तक मैनुअली गेट पास जारी किया जा सकता है, लेकिन इसे अगले दिन पोर्टल पर अपडेट करना होगा।
सोमवार की सुबह अचानक सीएम मनोहर लाल करनाल की नई अनाज मंडी में निरीक्षण के लिए पहुंचे। जाते ही वे मार्केट कमेटी सचिव कार्यालय में पहुंचे। इस दौरान सीएम ने आढ़तियों और राइस मिलर्स के साथ बैठक कर खरीद प्रक्रिया की समीक्षा की। इसके बाद जैसे ही बैठक करके सीएम बाहर निकले तो बाहर खड़े किसान नरेंद्र राणा, राममेहर सिंह समेत अन्य ने कहा कि सीएम साहब पोर्टल वाला सिस्टम बंद कर दो, कई-कई दिन से किसान मंडी में पड़े हैं, लेकिन उनको गेट पास नहीं मिल रहे हैं। इस पर सीएम ने पोर्टल को किसान हित में बताते हुए समस्याओं के जल्द समाधान का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि इस बार पोर्टल पर कपास, बाजरा व मक्का की खरीद के बारे में भी शेड्यूल दिया गया है, जिससे पोर्टल पर लोड ज्यादा है, इसलिए थोड़ी दिक्कत चल रही है। जल्द ही खामियां दुरुस्त कर दी जाएंगी।
सीएम ने कराई बोली, दो रुपये अधिक बिकी धान
मुख्यमंत्री ने अपनी उपस्थिति में बड़ौता निवासी किसान रणबीर की धान की नमी तीन बार चेक करवाई, जिसमें 19 प्रतिशत नमी पाई गई। उस ढेरी की अपने सामने बोली करवाई, सरकारी बोली 1888 रुपये से शुरू हुई। बोली के समय मिलर ने 1890 रुपये प्रति क्विंटल का रेट लगाया, जिससे किसान को 2 रुपये प्रति क्विंटल का मुनाफा हुआ। मुख्यमंत्री ने सरकारी खरीद एजेंसियों, आढ़तियों को निर्देश दिए कि वे अच्छी क्वालिटी की मॉयश्चर मशीन रखें जोकि सही रीडिंग दे। उन्होंने मंडी सचिव को भी कहा कि वे एक की बजाय दो मॉयश्चर मशीन रखें, ताकि किसान का संदेह दूर करने के लिए क्रास चेक करवाया जा सके।
बिना शेड्यूल के आने वालों की भी हो खरीद
मुख्यमंत्री नेे कहा कि सरकार द्वारा किसानों की सुविधा के लिए 17 प्रतिशत की बजाय 19 प्रतिशत तक की नमी वाली धान खरीदी जा रही है, लेकिन किसानों को चाहिए कि वे धान को सुखाकर ही मंडियों में लेकर आएं। उन्होंने मंडी सचिव को निर्देश दिए कि बिना शेड्यूल के किसान मंडियों में धान लेकर आ रहे हैं, उन्हें आढ़तियों की सलाह से गेट पास दिए जाएं और उनकी धान खरीदी जाए।