खेल मंत्रालय ने देश भर में राष्ट्रीय खेल महासंघ के तहत संचालित स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के नाम की दोनाें फेडरेशनों को अमान्य कर रखा है। दोनाें स्कूली खेल संघ अब बिना मान्यता के चल रहे हैं। जिसके लिए केंद्र सरकार ने निदेशक माध्यमिक शिक्षा निदेशालय पंचकू ला सहित सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखकर पहले ही सूचित कर दिया है, लेकिन इसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 14 से 22 मई के बीच फ्रंास के नॉरमंडे में होने वाली जिम्नास्ट प्रतियोगिता में फेडरेशन द्वारा खिलाड़ियों को भेजने का दावा किया जा रहा है। इतना ही नहीं प्रत्येक खिलाड़ी पर होने वाले खर्च की राशि भी संस्था के खाते में जमा कराई जा रही है। जिसे लेकर केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि खिलाड़ियों के परिजन ऐसी किसी भी प्रतियोगिता में अपने बच्चों को न भेजें, इस प्रतियोगिताओं में मिलने वाले प्रमाणपत्र मान्य नहीं होंगे।
केंद्रीय खेल मंत्रालय के उप सचिव एसपीएस तोमर ने 22 अप्रैल को स्कूली गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रधान रंजीत कुमार और महासचिव आलोक खरे को पत्र लिखकर कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा स्कूल गेम्स के लिए किसी भी राष्ट्रीय खेल महासंघ को मान्यता नहीं दी गई है। फिर भी उनके द्वारा 26 मार्च को विभिन्न खेलों में 40 खिलाड़ियों की एक सूची शिक्षा निदेशक पंचकूला के नाम जारी की गई है। जिसमें लेटरहेड पर केंद्र सरकार सहित भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के लोगो का प्रयोग किया है जोकि गलत है।
जबकि 31 दिसंबर 2020 को मान्यता रद्द करने के बाद स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) की मान्यता का कोई नवीनीकरण नहीं किया गया है। यह भी देखा गया है कि एसजीएफआई के अध्यक्ष वी. रंजीत कुमार के नेतृत्व में और एसजीएफआई के महासचिव आलोक खरे के रूप में युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त होने का दावा कर रहे हैं। साथ ही केंद्र सरकार और भारतीय खेल प्राधिकरण के प्रतीक चिन्हों का भी उपयोग कर रहे हैं, जो अनाधिकृत है। पत्र में युवा मामले और खेल मंत्रालय और केंद्र सरकार के प्रतीक चिह्न और साई के लोगो लेटरहेड्स, प्रकाशनों आदि से तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
वर्जन
स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सहायक सचिव कन्हैया गुर्जर ने बताया कि 2017 में स्कूल गेम्स फेडरेशन के तहत ऑस्ट्रेलिया गई खिलाड़ियों की टीम में से एक बच्चे की मौत होने के बाद मामला गर्मा गया था। इसके बाद स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राजेश मिश्रा गुट का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नए बने संगठन के नए अध्यक्ष रंजीत कुमार को पुराने संगठन के लोगों ने कार्यभार नहीं दिया था। जिसके चलते दो संगठन चलते रहे हैं। 29 दिसंबर 2020 को चुनाव हुए थे, जिसे सरकार द्वारा अमान्य करार कर दिया गया था। बाद में केंद्र सरकार ने दोबारा पांच फरवरी को चुनाव कराने के आदेश दिए थे, लेकिन सरकार द्वारा चुनाव कराने के बाद दोनों ही संगठनों की मान्यता 31 दिसंबर 2020 के बाद खत्म कर दी थी, जो अभी तक अमान्य है। इसके बाद भी यह संस्थाएं अवैध रूप से खिलाड़ियों के ट्रायल कर इंटरनेशनल प्रतियोगिता के नाम पर मोटी रकम की मांग कर रही हैं। साथ ही अपने लेटरहेड में केंद्र सरकार और भारतीय खेल प्राधिकरण के लोगो का प्रयोग कर खिलाड़ियों को भ्रमित कर रही है, जबकि अमान्य होने के कारण प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों को मिलने वाले प्रमाणपत्र अमान्य ही माने जाएंगे।