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Karnal News: श्री कृष्ण-रुक्मिणी के विवाह की मनाईं खुशियां

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- पराशर तीर्थ स्थित नंदीशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा
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संवाद न्यूज एजेंसी

निसिंग। प्राचीन पराशर तीर्थ स्थित नंदीशाला गांव बहलोलपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भगवान श्री कृष्ण रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग सुनाया गया। कथा में प्रवचन करते हुए आचार्य प्रदीप गौड़ ने कहा कि रुक्मिणी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री व साक्षात लक्ष्मी का अवतार थीं। रुक्मिणी ने जब देवर्षि नारद के मुख से कृष्ण के रूप, सौंदर्य एवं गुणों की प्रशंसा सुनी तो उसने मन ही मन श्री कृष्ण से विवाह करने का निश्चय किया। रुक्मिणी विवाह का मंचन देख श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
उन्होंने कहा कि भक्ति, प्रेम के माध्यम से भक्त भगवान का मन जीत सकते हैं। भगवान धरती पर कण-कण में विराजमान हैं। हमें स्वार्थ को भूलकर मन व कर्म-कार्य करने चाहिए। हमें दुखों से नहीं घबराना चाहिए और सुख से ज्यादा खुश नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि श्री कृष्ण भगवान का नाम जपने से मनुष्य को परमधाम की प्राप्ति होती है। सभी को हर समय उनके नाम को अपने हृदय में रखना चाहिए। उसी नाम का जप करने से मानव की मुक्ति हो सकती है, यदि हम अपने इष्ट देवता का मनन नहीं करेंगे तो इस कलियुग में हमारा उद्धार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मनुष्य को सदा ही परमात्मा के प्रति समर्पित रहना चाहिए, ताकि इस कलियुग में उनका उद्धार हो सके।
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गौशाला संचालक गोपाल गो स्वामी ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस बार भी भारी संख्या में संत जन व श्रद्धालु पहुंच सहयोग दे रहे हैं। स्वामी ने कहा कि गाय मात्र नाम के लिए नहीं है बल्कि हर परिवार में खाना बनाते समय हर रोज पहली एक रोटी गाय के लिए निकालनी चाहिए। जिस परिवार में देशी गाय का पालन होगा वहां कोई बीमारी नहीं आएगी। देशी गाय के महज शरीर पर हाथ फेरने से कई प्रकार की बीमारियों से मनुष्य को मुक्ति मिल जाती है।
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नंदीशाला में विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इसमें सैकड़ों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर पुण्य का लाभ ले रहे हैं। इस मौके पर राजकुमार गोयल, कैलाश गोयल, सुशील सिंगला, अजय गोयल, अंकुश सिंगला, अशोक जिंदल, वेदप्रकाश गोयल, रामकुमार वर्मा, चंचल राणा, महिपाल राणा, सेठपाल राणा और राजेश भारद्वाज का सहयोग रहा।
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