फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बैंकों में कैश हो रहा कम, लोगों का निकल रहा दम

Thu, 24 Nov 2016 12:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
विज्ञापन
बैंकों में कैश हो रहा कम, लोगों का निकल रहा दम - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
नोट बदलवाने को लेकर बैंकों में लोगों की लाइनें नहीं टूट रही हैं, वहीं कई कई घंटे तक लाइनों में लगने से कारण लोग हांप रहे हैं। बावजूद इसके लोगों को पैसे नहीं मिल रहे हैं। बुधवार को जिलेभर की 350 बैंकों की ब्रांचों में करीब 500 करोड़ रुपये जमा हुए तो ग्राहकों को 25 करोड़ रुपये दिए गए। हालांकि, सभी एटीएम अभी तक सुचारू रूप से काम नहीं कर रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं की समस्याएं कम होने की बजाए बढ़ रही है। उधर, सहकारी बैंकों द्वारा किसानों से पुराने नोट नहीं लेने को लेकर भी किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बैंक किसानों को केवल पुराने नोंटों पर बीज दे रहे हैं, जबकि खाते में पैसे भी जमा नहीं करा रहे हैं।
विज्ञापन


इसी प्रकार, शादी वाले परिवार ढाई लाख रुपये के लिए कभी बैंक मैनेजर के चक्कर काट रहे हैं तो कभी डीसी के। इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को आ रही है। एक तरफ तो बैंक कैश नहीं दे रहे हैं तो दूसरी सहकारी बैंकों में तो बैंकों ने पुराने नोट तक लेने से इंकार कर दिया है। मतलब किसान को न पैसे मिल पा रहे हैं और न ही वह जमा करा पा रहा है। गौरतलब है कि सहकारी बैंकों व समितियों में हर छह माह में किसान हिसाब करता है और पिछला बकाया सीजन पर जमा कराता है, लेकिन इस बार बैंक पैसे जमा नहीं कर रहे हैं। ऐसे में अगर किसान समय पर पिछला बकाया नहीं चुकाएगा तो वह डिफाल्टर हो सकता है।

नहीं बदले जा रहे पुराने नोट
असंध। कस्बे के सहकारी बैंको में किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां पर न तो किसानों की लिमिट की जा रही हैं और न ही उनसे धान की फसल के दौरान लिए गए खाद बीज के रुपये लिए जा रहे हैं। इन बैंको में किसानों के पुराने नोट भी नहीं बदले जा रहे हैं, जिस कारण किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन बैंकों से केवल उन किसानों को ही रूपये दि जा रहे हैं जिनके खाते में पहले से रूपये जमा हैं अगर कोई किसान अपने खाते में रुपये जमा करवाने जाता है तो उससे रुपये नहीं लिए जा रह, जिस कारण ये बैंक किसानों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। असंध कस्बे के किसानों सालवन निवासी संजय राणा, जगदीप, जसमत राहडा निवासी मनोज, कृष्ण, प्रमोद, बाहरी निवासी रमेश , जगदीश, चोरकारसा निवासी नसीब, सुरेश, राजेश आदि ने बताया कि इस समय रबी की फसल की बुवाई का सीजन चला हुआ है। पिछली फसल के दौरान हमने कोऑरेटिव सोसायटी अर्थात द सहकारी बैंकों से खाद, बीज लिया था, लेकिन अब अगर किसान बैंक में उनके रुपये जमा करवाने जाता है तो उनसे खाद-बीज के पैसे नहीं लिए जा रहे हैं।
विज्ञापन


बैँक कर्मचारी किसानों को नई करंसी खुले रूपये लाने की बात बोल रहे हैं, अब किसान नई करेंसी या खुले रुपये कहां से लेकर आएं? किसान अगर लिमिट भरने जाता है तो उनसे लिमिट नहीं ली जा रही। बाक्सअब डिफाल्टर होने का डरअसंध के साथ घरौंडा, नीलोखेड़ी व इंद्री के सहकारी बैंकों के भी यही हालात हैं। इन बैंकों में किसानों के रुपये तक नहीं बदले जा रहे हैं। यहां तक कि बैँक से किसानों की लिमिट भी नहीं की जा रही हैं। इन बैंको से केवल उन्हीं किसानों को रूपये मिल रहे हैं जिनके खाते में पहले से ही रुपये जमा हैं। ऐसे समय पर पैसे नहीं जमा कराने पर बैंक किसान को डिफाल्टर कर देगा।

अगर कोई किसान अपन खाते में रूपये जमा करवाने जाता है तो कर्मचारी रुपये जमा करने से साफ मना कर रहे हैं। जिस कारण किसानों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का सवाल है कि जब किसान खुद आकर पैसे भर रहा है तो बैंक को क्या दिक्कत है? इस बारे में भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष रत्न मान का कहना है कि किसानों के साथ गलत हो रहा है। किसानों से सहकारी बैंकों को पैसे लेने चाहिए, ताकि वह डिफाल्टर न हो सके। इसके लेकर भाकियू की बैठक बुलाकर मंथन किया जाएगा। बाक्स आदेश नहीं हैं : प्रबंधकइस मामले में असंध कोआपरेटिव सोसायटी के प्रबंधक सुभाष का कहना है कि 14 नवंबर से पूरे भारत के सहकारी बैंकों में किसानों द्वारा लिमिट भरने पर रोक लगा दी गई है, जिस कारण हम लिमिट नहीं भरवा रहे हैं।

जिन किसानों के खाते में रूपये हैं उनको नई करेंसी भी दी जा रही है। नोट बदलने का आदेश हमें नहीं है, इसलिए नोट नहीं बदले जा रहे। किसानों से पांच सौ व हजार के नोट लेकर बीज दिया जा रहा है, किसी से भी नई करेंसी लाने की बात नहीं की जा रही है। हमारा पूरा प्रयास है किसी भी किसान को कोई दिक्कत न हो इसके लिए सभी कर्मचारी पूरा प्रयास कर रहे हैं। वहीं, सहकारी बैंक के सीईओ राममूर्ति का कहना है कि किसानों को पूरा सहयोग किया जा रहा है। बैंक आरबीआई के नोटिफिकेशन पर ही काम कर रहे हैं।

शादी वाले परिवार कहां जाएं
बेशक सरकार ने आदेश जारी कर दिए हों, लेकिन बैंक शादी वाले परिवारों को सहयोग नहीं कर रहे हैं। लोग कार्ड लेकर बैंकों और अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। पर पैसे कहीं से भी नहीं मिल रहे हैं। अधिकारी केवल मीटिंग करते हैं और निर्देश जारी कर देते हैं, हकीकत में लोग परेशान हैं। राजबीर सिंह ने बताया कि उसके बेटे की शादी है, लेकिन पैसे नहीं है। अमरनाथ ने बताया कि उसकी बेटी शादी दिसंबर माह में, तैयारी के लिए समय नहीं है, हर कार्य के लिए पैसा चाहिए, पैसा बैंक में है और बैंक रास्ता नहीं दे रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें