माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जाट धर्मशाला में वीरवार को वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल का बलिदान दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में 36 बिरादरियों के लोगों ने भाग लिया और एक मंच पर एकत्र होकर भाईचारे और एकता का संदेश दिया। वक्ताओं ने महाराजा सूरजमल के बलिदान, शौर्य और सुशासन को याद करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
जाट धर्मशाला के पदाधिकारियों और एमएसओ ग्रुप की ओर से महाराजा सूरजमल के बलिदान को नमन किया गया। कार्यक्रम के दौरान समाज में आपसी सौहार्द और एकता बनाए रखने का संदेश दिया गया। जाट धर्मशाला के प्रधान भूपेंद्र लाठर उर्फ भूप्पी ने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास से जुड़कर ही समाज और राष्ट्र को मजबूत किया जा सकता है। महाराजा सूरजमल का जीवन युवाओं को स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रप्रेम की सीख देता है। कार्यक्रम में बताया गया कि महाराजा सूरजमल भारत के महान योद्धाओं, कुशल शासकों और दूरदर्शी राजनीतिज्ञों में गिने जाते हैं। वे जाट समुदाय के गौरव और भरतपुर रियासत के संस्थापक शासक थे। उनका जन्म 13 फरवरी 1707 को भरतपुर क्षेत्र के सिनसिनी गांव में हुआ था। वे महाराजा बदन सिंह के पुत्र थे और बचपन से ही उनमें नेतृत्व व युद्ध कौशल के गुण दिखाई देने लगे थे।
मुगल दौर में रखी मजबूत राज्य की नींव
महाराजा सूरजमल ने मुगल साम्राज्य के समय अपनी सूझबूझ और सैन्य शक्ति के बल पर एक स्वतंत्र और सशक्त राज्य की नींव रखी। कूटनीति और युद्ध कौशल में निपुण होने के कारण इतिहासकार उन्हें जाटों का प्लेटो भी कहते हैं। भरतपुर का लोहागढ़ किला महाराजा सूरजमल की दूरदर्शिता और सैन्य रणनीति का प्रतीक माना जाता है। यह किला कई हमलों के बावजूद अजेय रहा। महाराजा सूरजमल का निधन 25 दिसंबर 1763 को हुआ लेकिन उनका जीवन आज भी साहस और सुशासन की प्रेरणा देता है। मौके पर एमएसओ ग्रुप के दिनेश दलाल, विक्की नरवाल, महावीर मलिक, छपनू नरवाल, मासा पहलवान, विक्रम मान, धमेंद्र लाठर सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।