संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने शिक्षण संस्थान बायजूस को सेवा में कोताही का दोषी पाते हुए शिकायतकर्ता को पूरी फीस वापस करने और 15 हजार 500 रुपये हर्जाना भरने का आदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब छात्र ने सेवाएं ली ही नहीं तो संस्थान का फीस के रुपये रोकना सेवा में कमी है।
नरसी विलेज निवासी शिकायतकर्ता पुनीत भाटिया और स्वाति भाटिया ने अपने बेटे नमन के छठी की पढ़ाई के लिए 03 दिसंबर 2023 में बायजूस के करनाल स्थित केंद्र में दाखिला करवाया था। संस्थान के प्रतिनिधियों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि छात्र 14 दिनों के भीतर ओरिएंटेशन क्लास ले सकता है और संतुष्ट न होने पर पूरी राशि रिफंड के साथ पंजीकरण रद्द करा सकता है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार उनका बेटा संस्थान की ओरिएंटेशन क्लास से संतुष्ट नहीं हुआ, जिसके बाद उन्होंने निर्धारित 14 दिनों के भीतर संस्थान की पाॅलिसी के तहत कैंसिलेशन फॉर्म भरा और ई-मेल भी भेजा। हालांकि, संस्थान ने आठ हजार रुपये की शुरुआती राशि वापस करने के बजाय शिकायतकर्ता के खाते से अवैध रूप से मासिक किश्त के 4278 रुपये काट लिये।
इस प्रकार सेंटर के पास उनके 12278 रुपये हो गए। उन्होंने सेंटर में जाकर रुपये वापस देने की मांग तो उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इसके बाद भी सेंटर संचालक उनके खाते से राशि काटते गए और 29390 रुपये काट लिये। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग के समक्ष शिकायत रखी। आयोग ने मामले में सुनवाई के दाैरान पाया कि बायजूस ने शिकायतकर्ताओं के दावों का ठोस खंडन नहीं किया। वहीं, साक्ष्य प्रस्तुत करने के पर्याप्त अवसर मिलने के बावजूद बायजूस अनुपस्थित रहा। इस कारण से आयोग ने उन्हें एकतरफा (एक्सपार्टी) घोषित कर दिया गया।
45 दिन के भीतर करना होगा आदेश का पालन
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों नीरू अग्रवाल और सर्वजीत कौर की पीठ ने विपक्षी को शिकायतकर्ता की ओर से जमा की गई राशि 29390 रुपये वापस करनी होगी। इसके अलावा मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 10 हजार रुपये का हर्जाना देना होगा। शिकायतकर्ता की ओर से कानूनी कार्रवाई पर खर्च की गई 5500 रुपये की राशि का भुगतान भी शिक्षण संस्थान को करना होगा। इसके अलावा इस आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया है।