भाकियू के आंदोलन के बाद आखिरकार मंगलवार को शुगर मिल का पिराई सत्र शुरू हो गया। भाकियू ने सत्र को 22 नवंबर से शुरू करने की मांग की और साथ ही शुगर मिल के नवीनीकरण की मांग रखी थी, लेकिन दोनों ही मांगों को दरकिनार कर पुरानी मशीनों के सहारे एक बार से शुगर मिल को शुरू कर दिया गया है।
इस वर्ष मिल एरिया में गन्ने का रकबा 16055 एकड़ है। इसमें 86 प्रतिशत से ज्यादा अगेती किस्मों का गन्ना है। इस वर्ष मिल में गन्ने की कुल बोंडिग 43 लाख क्विंटल है। गन्ने का पिराई लक्ष्य 32 लाख क्विंटल रखा गया है। इसके साथ-साथ गन्ने से रिकवरी का लक्ष्य भी 10.90 प्रतिशत रखा है। अगेती किस्म में यह लक्ष्य अधिक होने की संभावना है।
गौरतलब है कि फेरडरेशन की तकनीकी टीम कई साल पहले ही इस शुगर मिल को कंडम घोषित कर चुकी है और खतरे का अंदेशा भी जता चुकी है। मंगलवार को हैफेड के चेयरमैन हरविंद्र कल्याण ने हवन यज्ञ के साथ शुगर मिल के 41वें पिराई सत्र का शुभारंभ किया। इस मौके पर शुगर मिल की एमडी वर्षा खांगवाल, एसडीएम योगेश कुमार सहित मिल के सभी मौजूद डारेक्टरज व अन्य अधिकारियों ने हवन यज्ञ में आहुति डाली।
17 बार मिल रहा प्रथम
करनाल शुगर मिल वर्ष 1976 में स्थापित हुआ था। इसके बाद से इसका आज तक नवीनीकरण नहीं हुआ। अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता, क्षमता के चलते करनाल चीनी मिल राष्ट्रीय स्तर पर 17 बार प्रथम और द्वितीय स्थान हासिल कर चुका है। पिराई सत्र 2012-13 एवं 2013-14 में गन्ना विकास में प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर चुका है। शुगर मिल के प्रबंध निदेशक वर्षा खांगवाल ने बताया कि करनाल सहकारी चीनी मिल ने सीजन 2015-16 में 25. 50 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई करके 2.77 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। इसके चलते मिल की रिकवरी 10. 87 प्रतिशत रही जो कि हरियाणा के सभी सहकारी चीनी मिलों में दूसरे नंबर पर है। एमडी ने यह भी बताया कि पिछले वर्ष मिल ने किसानों के गन्ने में लगने वाले कीटों की रोकथाम के लिए 81. 45 लाख रुपये की दवाइयां ब्याज रहित ऋण पर प्रदान की है। इस वर्ष भी मिल द्वारा किसानों के लिए 316 .33 लाख रुपये की गन्ना विकास योजना बनाई है। इसके अतिरिक्त मिल में राज्यस्तरीय टिशु कल्चर लैब की स्थापना की गई है।
पहली ट्राली लाने वाले दयानंद को किया सम्मानित
विधायक हरविंद्र कल्याण और उपायुक्त मंदीप सिंह बराड़ ने चालू गन्ना पिराई सीजन में सबसे पहले गन्ने की ट्राली लाने वाले शेखपुरा के दयानंद, सबसे पहले गन्ने की बुग्गी लाने वाले फुसगढ़ निवासी जगमीत सिंह और सबसे पहले गन्ने का ट्रक लाने वालेे मोहित कलसौरा को सम्मानित किया। इसके अलावा, पवन कल्याण उप-चेयरमैन, बलविंद्र सिंह धूमसी, ललित कुमार, लाभ सिंह संधू, सोमपाल, तेजपाल कलसौरा, युद्धवीर सिंह, राजपाल सन्धू, रतन सिंह नलीखुर्द को शाल देकर सम्मानित किया।
कई आंदोलन हुए, मिले कोरे आश्वासन
कई बार आंदोलन करने के बाद भी शुगर मिल की मशीनों में कोई सुधार नहीं हुआ। न तो इसके टरबाइन बदले गए और न ही बायलर। भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष रत्न मान का कहना है कि तकनीकी रूप से कंडम घोषित किए जा चुके शुगर मिल को बिना नवीनीकरण के चलाने में खतरे का अंदेशा है। सीएम और कोऑपरेटिव मंत्री ने भी मिल के नवीनीकरण के आश्वासन दिए थे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसके अलावा, बार बार मिल बंद होने के कारण किसानों को परेशानी उठानी पड़ती है। पिछली बार भी कई बार शुगर मिल बंद हुआ था। भाकियू गन्ने का रेट 350 रुपये प्रति क्विंटल की मांग करती है, जल्द ही इसके लिए आंदोलन किया जाएगा। उधर, इस बारे में शुगर मिल की एमडी वर्षा खंगवाल का कहना है कि मिल पूरी तरह से तैयार है मशीनों की मरम्मत आदि करवाई गई है, मिल बिल्कुल ओके है। उम्मीद है कि पिराई सत्र अच्छा रहेगा।