मेरठ रोड क्षेत्र के करीब पंद्रह गांवाें के लोगों के लिए उनके गांवाें के
रूटों पर दौड़ने वाली सहकारी समिति की बसें जी का जंजाल बनी हैं। इस रूट पर
हरियाणा राज्य परिवहन समिति की बसें नहीं चलने और सहकारी समिति की पांच
बसों द्वारा सवारियां नहीं उठाना लोगों के लिए परेशानी का कारण बना है।
क्षेत्र के करीब 40 हजार से अधिक लोग यह परेशानी दिक्कतें झेल रहे हैं।
क्षेत्र के ग्रामीणों का आरोप है कि इस रूट पर सहकारी समिति की पांच बसों
को अधिकारी सांठगांठ के साथ ऑफ रूट चलवा रहे हैं।
अधिकारियों को सीएम,
परिवहन मंत्री, विभाग के आयुक्त एवं किसी भी अधिकारी के आदेश की कोई परवाह
नहीं है।
गांव मंगलौरा के पंच कर्मबीर, सरपंच के भतीजे नवीन ने बताया
कि इस रूट पर करनाल से चलते ही शुगर मिल, शेखपुरा, शेखपुरा मीरघान, रांवर,
नगला फार्म, गंजोगढ़ी, नगला चौक, मोदीपुर, ढाकवाल, अंधेडा, मंगलौरा,
लालूपुरा समेत करीब पंद्रह गांवों के बस अड्डे लगते हैं।
इस रूट पर पहले
रोडवेज की बसें चलती थीं तो लोगों को कोई दिक्कत नहीं होती थी, लेकिन पिछले
कई सालों से रोडवेज की बस हटाकर अधिकारियों ने सांठगांठ कर करनाल से
उत्तरप्रदेश के बड़ौली तक यह बसें चला रखी हैं। बीच में पड़ने वाले गांवों
की सवारियों को इन बसों के चालक परिचालक नहीं बैठाते।
इन लोगों के अनुसार
सहकारी समिति की पांचों बसें अपने मूल रूट छोड़कर अवैध रूट पर दौड़ रही
हैं। विपरीत दिशा करनाल से बल्ला रूट की बस पर उत्तरप्रदेश के बड़ौली जा
रही है। हरियाणा सहकारी समिति की बसों को उत्तरप्रदेश में जाने की इजाजत है
या नहीं। यह तो अधिकारी बता सकते हैं। यह निश्चित है कि बसें बड़ौली जाती
हैं।
गांवों के लोग संबंधित विभाग के अधिकारियों और इन सहकारी समिति के
तमाम सदस्यों के खिलाफ अदालत भी जाने का विचार बना रहे हैं। वह लोग 26
गांवाें की पंचायतों के मांग पत्र समेत मुख्यमंत्री से लेकर परिवहन मंत्री,
परिवहन आयुक्त और रोडवेज के जीएम और डीटीओ से मिल चुके हैं।