हमारी जान पे बनी है मम्मी, हमें बचा लो! हमारे सारे चेहरे पर जलन हो रही है, आंखों में भी जलन है। यहां कोई मच्छरों की दवा छिड़कवाई गई है। हमें बहुत डर लग रहा है। विलाप करते हुए बच्चों ने स्कूल से अपने मम्मी और पापा को कुछ इसी तरह से फोन किए। मामला है जरनैली कॉलोनी स्थित दयाल सिंह मेन स्कूल का। बच्चों को रोता देख उनके अभिभावक दौड़े चले आए। बच्चों के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर अभिभावकों के पांव तले से जमीन खिसक गई। हड़बड़ाहट में किसी ने भी किसी से बात करने की बजाय स्कूल में पहुंचना जरूरी समझा। छुट्टी के समय स्कूल में करीब 2500 विद्यार्थी मौजूद थे। दरअसल रोजाना की तरह दयाल सिंह मेन में दो दिनों की छुट्टी के बाद बच्चे स्कूल पहुंचे। करीब आठ बजे स्कूल में लगभग सभी बच्चे पहुंच चुके थे। इसके बाद प्रार्थना सभा आयोजित हुई और सभी बच्चे प्रार्थना के बाद अपनी कक्षाओं में बैठ गए। कुछ ही क्षणों में बच्चों को सिरदर्द, चेहरे व आंखों में जलन होने लगी। बताया जा रहा है कि इसी दौरान दो बच्चे बेहोश भी हो गए। आननफानन में सभी कक्षाओं के बच्चों की सुबह करीब 10 बजे छुट्टी घोषित कर दी गई। साथ ही अभिभावकों के मोबाइल पर मैसेज कर दिए गए। इससे स्कूल प्रबंधन की सांसें फूल गईं। मैसेज में लिखा था कि मच्छर मार स्प्रे के कारण बच्चों को घर भेजा जा रहा है। चूंकि इससे वह प्रभावित हो रहे हैं। यदि किसी को ज्यादा दिक्कत हो रही है तो वह ठंडे पानी और साबुन से स्किन को साफ कर लें। साथ ही नारियल या सरसों का तेल लगाएं। कृपा स्कूल का सहयोग करें। इसे पढ़कर अभिभावक घबरा गए। स्प्रे से बच्चों में हड़कंप मच गया और बच्चों को उल्टियां लगने लगीं, आंखों और शरीर पर जलन होने लगी।
मामला संदिग्ध, कहीं केमिकल का तो नहीं हुआ रिसावबच्चों को लेने स्कूल पहुंचे अभिभावकों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि यदि स्प्रे कराना था तो पहले क्यों नहीं कराया। उन्होंने कहा कि स्प्रे तो वह अपने घरों में भी कराते हैं। इस तरह कभी दिक्कत नहीं होती। स्कूल की केमिस्ट्री लैब में ब्रोमीन और बैंजीन लिक्विड के रिसाव या खुले रहने से इस तरह की घटना संभव है। यदि ऐसा है तो यह एक गंभीर मामला है। चूंकि यह दोनों रसायन प्रतिबंधित हैं। इनके इस्तेमाल के लिए बाकायदा परमिशन लेनी जरूरी होती है। शोध के लिए रिसर्चर इन दोनों केमिकल का प्रयोग करते हैं। हालांकि 12वीं तक इन केमिकल का प्रयोग स्कूली प्रयोगशालाओं में नहीं किया जाता, लेकिन अक्सर स्कूली टीचर खुद की शोध के लिए प्रयोगशाला में इनको मंगवा लेते हैं। बैंजीन को कार्बनिक विलायक भी कहा जाता है। खुले रहने पर यह वाष्प में तब्दील हो जाते हैं। इससे यह आसपास के वातावरण को प्रभावित कर सकते हैं। उल्टी आना, जलन, बेहोशी इत्यादि इनके परिणाम स्वरूप हो सकते हैं। स्कूल गेट से बाहर आए बच्चों ने लैब में लीकेज की बात कही, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इसकी पुष्टि नहीं की।
मीडिया को नहीं करने दिया स्कूल में प्रवेशपूरे मामले से पल्ला झाड़ने के लिए स्कूल प्रिंसिपल व अन्य स्टाफ ने मीडिया को स्कूल गेट में प्रवेश नहीं करने दिया। जैसे ही मीडिया मौके पर पहुंची, स्कूल का मुख्य गेट बंद कर दिया गया, ताकि किसी को कानों कान पूरे मामले की भनक न लगे। जब मीडिया कर्मियों ने स्कूल के अंदर जाने और प्रबंधन से बात करने को कोशिश की तो प्रबंधन ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
जब अभिभावक को नहीं मिले स्कूल में बच्चे सुबह करीब 11 बजे हाउसिंग बोर्ड से अभिभावक भारत भूषण स्कूल में पहुंचे। हर जगह तलाशने के बाद भी उन्हें बच्चे स्कूल में नहीं मिले। इस पर उन्होंने कड़ा रोष जताया। भारत भूषण ने बताया कि स्कूल में उनके दो व उनके भाई का एक बच्चा पढ़ता है, लेकिन स्कूल के पास कोई रिकार्ड नहीं है कि वे दोनों कहां हैं। भूषण ने बताया कि पांचवीं में भूमि व एलकेजी में हार्दिक को हर जगह तलाश चुका है। करीब आधे घंटे बाद पता चला कि बच्चों को रिक्शा में घर भेज दिया गया है। इसी तरह प्रदीप कादियान ने बताया कि उसके दो बच्चे साहिल और परी स्कूल में पढ़ती है। जैसे ही मैसेज आया वह हर काम छोड़कर स्कूल पहुंचे। बच्चों को जलन हो रही है। अभिभावक विकास ने बताया कि वह नीलोखेड़ी थे जब फोन आया। कुछ ऐसा ही कहना था अभिभावक मीना देवी का।
इस मैसेज ने बढ़ाई अभिभावकों की दिक्कतेेंडियर पेरेंट्स, द चिल्डन आर बींग सेंट होम एज द स्कूल हेड गॉट मॉस्कीटो स्प्रे इन द रूम्स एंड इट इज इफेक्टिंग द स्टूडेंट्स, प्लीज कोआपरेट। इफ देयर इज इरीटेशन वॉश विद कोल्ड वॉटर एंड सॉप, एंड अप्लाई कोकोनेट ओर शीशम ऑयल।
हमने मलेरिया व डेंगू मच्छर से बचाव के लिए मच्छर मार दवा का स्प्रे कराया है। इससे कुछ बच्चों को दिक्कतेें हुई। बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल की छुट्टी करनी पड़ी। मीडिया कर्मी को यदि कोई काम करना है तो वह स्कूल के गेट के बाहर करे। स्कूल के अंदर आने की इजाजत मीडिया को नहीं है। हमारा कोई बच्चा बेहोश नहीं हुआ।मिसेज रमेश लाठर, प्रिंसिपल, दयाल सिंह मेन स्कूल।
मच्छर मार दवा के कारण बच्चों को बाई चांस कुछ दिक्कतें हो गई थी। केवल 5-6 बच्चों को ही दिक्कतें आई। केमिकल रिसाव जैसी कोई बात नहीं है। कमरों को धुलवा दिया गया है। कोई बच्चा अस्पताल में नहीं गया।बीआर गुलाटी, जीएम, दयाल सिंह ट्रस्ट।