जीटी रोड जाम करने व सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने और मारपीट के आरोप में जिला अदालत ने इंद्री के पूर्व विधायक राकेश कांबोज, अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन त्रिलोचन सिंह सहित पांच दोषियों को मंगलवार को सजा सुनाई। पांचों दोषियों को एक-एक साल की सजा और 2800 रुपये का जुर्माना किया है। सभी दोषियों को मौके पर ही 40-40 हजार जमानत मिल गई। दोषियों का कहना है कि वकीलों से बात कर आगे की रणनीति बनाई जाएगी और ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम करने के मामले में अदालत ने कड़ा रवैया अपनाते हुए मंगलवार को हजकां नेता व पूर्व विधायक, हरियाणा अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष त्रिलोचन सिंह, राजीव देओल, बालकिशन शर्मा, प्रवीन शर्मा को एक साल की सजा सुनाई है। मंगलवार को करनाल की जेएमआईसी विनोद कुमार की अदालत ने इन पांचों पर 2800 रुपये का जुर्माना भी लगाया। सोमवार को अदालत ने पांचों को दोषी करार दिया था। सुबह से ही अदालत के बाहर पांचों नेताओं के समर्थक जुट गए थे। दोपहर बाद पांचों दोषियों को 40-40 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी गई।
ये है मामलादिसंबर 2007 को नवगठित हजकां की रोहतक में रैली थी। इसमें भाग लेने जाने वाले हजकां नेताओं के वाहनों को करनाल पुलिस ने जब्त कर लिया था। एक दिसंबर को इसका विरोध करने जा रहे हजकां नेताओं को करनाल पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग के पास ही रोकते हुए उन पर जमकर लाठियां भांजी थीं और दोनों में झड़प हो गई थी। पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने व प्रशासन के काम में बाधा पहुंचाने सहित अन्य धाराओं में पांचों आरोपियों पर मामला दर्ज किया था।
अदालत का सम्मान, वकीलों से करेंगे सलाह : त्रिलोचन सिंहत्रिलोचन सिंह ने बताया कि वे अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं और इस विषय में अब अपने वकीलों से बात कर आगे की रणनीति बनाएंगे। पुलिस ने उस दौरान उन पर विभिन्न धाराओं के तहत गलत तरीके से मामला दर्ज कर दिया था और बर्बरता पूर्वक लाठियां भांजी थीं। इसमें बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं सहित कई मीडिया कर्मियों को भी चोटें आई थीं।