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बजट से किसानों के जख्मों पर मरहम का प्रयास

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विनोद कुमार सिंह
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करनाल। एक साल तक आंदोलन की आग में झुलस किसानों के जख्मों पर केंद्र सरकार ने मरहम लगाने का प्रयास किया है। इसके तहत बजट में किसानों के खातों में 2.37 लाख करोड़ रुपये की एमएसपी सीधे ट्रांसफर करने सहित कई बड़े एलान किए गए हैं। हालांकि किसान नेता और कृषि अर्थशास्त्री इससे संतुष्ट नहीं है। कृषि अर्थशास्त्री के अनुसार हर साल एमएसपी पर किसानों की फसल खरीद की जाती है। ऐसे में अलग से इसके लिए प्रावधान का किसानों को कोई विशेष फायदा नहीं होने वाला है।
उन्होंने कहा कि किसानों को एमएसपी का लाभ देने के लिए सरकार को कम से कम 5.5 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान करना चाहिए। दूसरी ओर किसानों की ओर से एमएसपी के लिए सी-2 प्लस 50 प्रतिशत फार्मूला लागू करने की मांग की जा रही है, जबकि सरकार ए-2 प्लस 50 प्रतिशत फार्मूले से भुगतान कर रही है।
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भले ही किसान आंदोलन थम गया है, लेकिन एमएसपी गारंटी कानून बनाने की मांग अभी बरकरार है। शायद यही कारण है कि इस बार बजट में एमएसपी के लिए अलग से 2.37 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जो सीधे किसानों के खाते में भेजने की घोषणा की गई है।
दरअसल हरियाणा व पंजाब में फसलों की एमएसपी का मुद्दा इसलिए भी बड़ा है, कारण कि यहां मंडी व्यवस्था दुरुस्त है और अन्य राज्यों की तुलना में एमएसपी पर अधिक खरीद होती है। तभी तो किसान आंदोलन में भी हरियाणा और पंजाब के किसानों ने बढ़ चढ़कर भागीदारी की, जिसके परिणाम स्वरूप भारत सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने के लिए बाध्य होना पड़ा। बजट के माध्यम से भी एकबार फिर मरहम लगाने का प्रयास किया गया है। इसके तहत जैविक खेती को बढ़ावा देने, किसानों को डिजिटल तकनीक से जोड़ने, पीपीपी मॉडल के तहत किसानों के लिए योजनाएं शुरू करने, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी को प्रोत्साहित करने सहित कई अन्य घोषणाएं की गई हैं।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
कृषि अर्थशास्त्री और एनडीआरआई के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डा. अजमेर सिंह का कहना है कि सरकार हर साल एमएसपी पर फसलों की खरीदारी करती है। ऐसे में एमएसपी के लिए इस बार 2.37 लाख करोड़ का अलग से प्रावधान कोई नई बात नहीं है। वैसे भी एमएसपी के तहत फसलों की खरीद के लिए कम से कम 5.5 लाख करोड़ के बजट का प्रावधान होना चाहिए, तभी इसका लाभ किसानों को मिल सकेगा।
क्या है एमएसप
एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य। यह वह मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से उनकी फसल खरीदती है। इसके तहत अगर बाजार में फसलों की कीमत गिर भी जाए तब भी सरकार तय एमएसपी पर ही किसानों से उनकी फसल खरीदती है। देशभर में किसी भी फसल की एमएसपी एक ही होती है और भारत सरकार के कृषि मंत्रालय की ओर से कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की अनुशंसाओं के आधार पर एमएसपी तय किया जाता है। देश में अभी 23 फसलें ही एमएसपी के दायरे में हैं।
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क्या है ए-2 और सी-2 फार्मूला
दरअसल कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में गठित राष्ट्रीय किसान आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सी-2 प्लस 50 प्रतिशत फार्मूले के तहत एमएसपी देने की सिफारिश की थी। इसके तहत किसानों के पास उपलब्ध जमीन और संसाधनों का भी मूल्यांकन होना था, जबकि सरकार की ओर से ए-2 प्लस 50 प्रतिशत की दर से एमएसपी का भुगतान किया जाता है। इसमें जमीन और किसानों के पास उपलब्ध संसाधनों की गणना नहीं की जाती, बल्कि केवल खेती पर आने वाले खर्च के अनुसार एमएसपी तय की जाती है। किसानों की मांग है कि सी-2 प्लस 50 प्रतिशत के फार्मूले पर उनकी फसल खरीदी जाए। साथ ही एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर फसल खरीद को अपराध घोषित किया जाए।
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