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Karnal News: टूटे डिवाइडर नहीं देते रात में दिखाई, उखड़े साइन बोर्ड से उलझने पर भी हो रहे हादसे

Sun, 07 Dec 2025 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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आईटीआई चौक के समीप टूटा डिवाइडर। संवाद
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करनाल। नेशनल हाईवे-44 हो या फिर स्टेट हाईवे, हर रास्ते पर कई जगह डिवाइडर टूटे हुए हैं। ये हादसों का कारण बनते हैं। कई जगह तो यह हालात हैं कि काफी दूरी तक डिवाइडर ही नहीं है, फिर जहां से डिवाइडर शुरू हो रहा है, उस जगह कोई संकेतक ही नहीं लगा हुआ। ऐसे में वाहन चालक स्थिति को समझ नहीं पाता और हादसे का शिकार हो जाता है।
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इसके अलावा हर 100 मीटर पर साइन बोर्ड उखड़े या हादसों के कारण टेड़े हो गए हैं। ये अपनी जगह से तिरछे होकर सड़क की तरफ झुके हैं। यह भी वाहनों में उलझते हैं लेकिन एनएचएआई या अन्य विभागों के अधिकारियों को यह खामियां दिखाई नहीं दे रहीं। यह स्थिति तब है, जब हर माह होने वाली सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में उपायुक्त हालात दुरुस्त करने और कोहरे से पहले जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दे रहे हैं, इसके बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।

शनिवार को अमर उजाला की टीम ने नेशनल हाईवे-44, काछवा रोड, इंद्री रोड और कैथल रोड का जायजा लिया। सभी जगह हर 100 से 200 मीटर क्षेत्र में कोई न कोई खामी दिखाई दी। कहीं डिवाइडर टूटा हुआ था तो कहीं ग्रिल गायब थी। इसके अलावा संकेतक तो कई जगहों पर टूटे हुए थे। कुछ जगहों पर नाले की स्लैब भी गायब है।
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संकेतकों से ही चालक समझते हैं आगे की स्थिति

सड़क सुरक्षा पर काम कर रहे शुभम भारद्वाज ने बताया कि संकेतक चालक के लिए लाइफलाइन के तौर पर काम करते हैं। रात में या दिन में इन्हीं संकेतकों को समझकर ही चालक आगे की स्थिति को समझता है। यदि ये ध्वस्त हैं, तो उन्हें प्राथमिकता पर दुरुस्त कराया जाना चाहिए। नेशनल हाईवे-44 पर तो 24 घंटे में 80 हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं, ऐसे में यहां सुरक्षा इंतजाम होना ज्यादा जरूरी है।




कोहरे में बिना संकेतक के दिखाई नहीं देते डिवाइडर

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ एडवोकेट राजकुमार और संदीप राणा का कहना है कि कोहरे में चालक सफेद पट्टी के सहारे ही आगे बढ़ता है। डबल रोड होते ही डिवाइडर शुरू होता है, लेकिन अगर यहां संकेतक नहीं है या डिवाइडर टूटा हुआ है तो दृश्यता कम होने की स्थिति में यह दिखाई नहीं पड़ेगा। इससे हादसे की संभावना 60 प्रतिशत तक ज्यादा बढ़ जाती है। डिवाइडर दुरुस्त करने के साथ यहां लाइट लगा संकेतक भी जरूर होना चाहिए।

एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी और नगर निगम को सड़कों के हालात को दुरुस्त करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। जहां दिक्कत हैं, उन्हें दुरुस्त करके अधिकारियों को इस माह होने वाली सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में रिपोर्ट देनी होगी। - उत्तम सिंह, उपायुक्त
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