दोनों राज्यों की सीमाओं को बांटती यमुना में हदबस्त तय करने के लिए वर्ष 1974 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री उमाशंकर दीक्षित की ओर से एक बिल का मसौदा तैयार किया गया था, जिस पर वर्ष 1975 में दोनों राज्यों को अमल करने के लिए कहा गया ताकि यमुना और इसकी अंदर की जमीन पर खेतीबाड़ी को लेकर आसपास बसे गांवों के लोगों में विवाद न हो। पिलर लगाने का काम दीक्षित अवार्ड-1974 को आधार मानकर किया जाएगा।
ये पिलर लंबे समय तक वजूद में रहें, इसका डिजाइनिंग में विशेषज्ञों ने खास ध्यान रखा है। जितना पिलर नदी में ऊंचाई पर रहेगा, उतना ही एक तिहाई हिस्सा जमीन के अंदर भी गढ़ा होगा। प्रत्येक पिलर की ऊंचाई 21.5 मीटर रखी गई है। पानी के अंदर लगने वाले पाइल पिलर होने के कारण यह 17 मीटर नीचे जमीन में रहेगा। ऑड-ईवन में पिलर का ऑड नंबर हरियाणा और ईवन यूपी के लिए है।
यमुना नदी में बाउंड्री पिलर बनाए जाने हैं। हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच यमुना में सीमा की सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से निशानदेही की जाएगी। इसे लेकर सर्वे भी किया जा रहा है। करनाल में निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। -मनीश यादव, डीआरओ, करनाल।