शाहाबाद की हेल्पर्स संस्था की ओर से श्रीमद्देवी भगवती बाला सुंदरी मंदिर धर्मशाला में आयोजित वर्ष के चौथे शिविर में रक्तदान करने के लिए बड़ी संख्या में युवा उमड़े।
रक्तदान शिविर का शुभारंभ समाजसेवी विनोद बंसल ने रिबन काटकर किया। रक्तदाताओं को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि मानव रक्त का उत्पादन किसी भी मशीन में संभव नहीं है, इसलिए जरूरत पड़ने पर खून की आपूर्ति मानव के रक्त से ही संभव है।
ऐसे में जरूरी है कि हम लोग ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करें ताकि आपात स्थिति में वह जिंदगी और मौत से जूझ रहे जरूरतमंद व्यक्ति के काम आ सके।
उन्होंने संस्था के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए अन्य समाजसेवी संस्थाओं से भी आह्वान किया कि ऐसे प्रकल्प ज्यादा से ज्यादा चलाएं ताकि जरूरतमंद लोगों की सहायता की जा सकें।
शिविर में रक्तदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष रूप से पधारे हरियाणा उर्दू अकादमी के निदेशक डॉ. देसराज सपड़ा ने कहा कि पीजीआई में हजारों लोग खून न मिलने की वजह से अक्सर दम तोड़ जाते हैं।
उन्होंने कहा कि खूनदान करने से शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती, इसलिए रक्तदान को लेकर किसी किस्म की कोई भ्रांति मन न पाले।
शिविर में पीजीआई चंडीगढ़ के डॉ. सुचेत सचदेवा के नेतृत्व में पहुंची टीम ने रक्तदाताओं से 251 यूनिट रक्त एकत्रित किया। उन्होंने रक्तदाताओं को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण टिप्स भी दिए। उन्होंने कहा कि हर स्वस्थ व्यक्ति को प्रत्येक तीन माह के अंतराल में नियमित रूप से रक्तदान करना चाहिए।
इससे मनुष्य स्वस्थ रहता है और रक्तचाप जैसी बीमारियों से बचाव होता है। इससे पहले संस्था के प्रधान तिलकराज अग्रवाल ने आए हुए सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें हेल्पर्स की ओर से चलाए जा रहे विभिन्न प्रकल्पों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने रक्तदान करने वाले सहयोगियों का हार्दिक धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके सहयोग के लिए संस्था सदैव ऋणी रहेगी। उन्होंने रक्तदाताओं को प्रोत्साहित करते हुए प्रमाणपत्र भी दिए। शिविर में बलदेव सिंह, संजीव शर्मा, यादवेंद्र सिंह, महेश गुप्ता सहित दर्जनों लोगों ने रक्तदान किया।
संस्था के चेयरमैन डॉ. प्रदीप गोयल ने बताया कि उनकी संस्था सड़क दुर्घटना में पीड़ित लोगों की सेवा बिना किसी भेदभाव से करती है। रक्तदाताओं के सहयोग से उत्साहित होकर ही संस्था ने इस वर्ष यह चौथा रक्तदान शिविर लगाया गया है, जबकि पहले हर वर्ष तीन शिविर ही लगाए जाते थे। इस अवसर पर इंद्रलाल बतरा, महेंद्र जग्गी, विजय बठला, जयपाल, राजबीर, सीताराम बतरा, हिमांशु गोयल, नरेश सैनी, वीरेंद्र ठुकराल, रवि गाबा, संजीव कुमार, मा. नरेंद्र शर्मा सहित संस्था के सदस्य मौजूद थे।