- कई दिनों की खामोशी के बाद भाजपा के बड़े नेता नहीं पहुंचे बख्शीश सिंह को मनाने, आखिर बदला पाला
देव शर्मा
करनाल। भाजपा के टिकट वितरण में पूर्व सीएम एवं मौजूदा केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के करीबी चेहरे चुनावी अखाड़े में उतारे गए हैं लेकिन नाराजगी दिखाने के बाद कुछ बागियों की मानमनौव्वल में शायद कमी रह गई है। जिसका परिणाम ये हुआ कि मंगलवार को भाजपा का एक और सियासी विकेट पूर्व विधायक बख्शीश सिंह विर्क के रूप में गिर गया है। अब इस सीट पर भाजपा को दोहरी चुनौती मिलेगी, इन चुनौती ने इस सीट पर भाजपा के चुनावी समीकरणों को भी बदल दिया है। यहां से भाजपा ने पार्टी के जिलाध्यक्ष योगेंद्र राणा को मैदान में उतारा है।
जिले की पांचों सीटों पर उतारे गए उम्मीदवार, करनाल के सांसद मनोहर लाल की पसंद हैं, क्योंकि वह पिछले 10 सालों से करनाल विधान सभा सीट से जीतकर राजनीति कर रहे हैं और अब केंद्रीय राजनीति की शुरुआत भी उन्होंने करनाल संसदीय सीट से ही की है, यही कारण रहा कि भाजपा के सभी उम्मीदवारों के नामांकन में वह स्वयं मौजूद रहे हैं।
करनाल सीट से जब जगमोहन आनंद को टिकट दिया गया तो करनाल सीट पर भी कई बागी स्वर उभरे, इनमें पूर्व मेयर रेणु बाला गुप्ता, पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक सुखीजा आदि के नाम उल्लेखनीय हैं, असंध सीट पर भी टिकट के प्रबल दावेदार पूर्व विधायक जिलेराम शर्मा, पूर्व विधायक बख्शीश सिंह विर्क ने बागी तेवर अपनाए।
करनाल सीट पर तो नाराज पूर्व मेयर रेणुबाला गुप्ता को मनाने के लिए कई गंभीर प्रयास किए गए। उनके आवास पर पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पहुंचे, फिर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल भी पहुंचे। समर्थकों की बैठक के बाद पूर्व मेयर रेणु बाला गुप्ता ने भाजपा का साथ देने का एलान किया लेकिन इसके बाद भी कहीं न कहीं पार्टी को आंतरिक नाराजगी का भय सताता रहा। ये भय पुख्ता तब हुआ, जब पूर्व मेयर रेणु बाला के साथ रहे कुछ पार्षद भाजपा छोड़कर कांग्रेस के पाले में जाने लगे तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं हरियाणा के भाजपा चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान भी उनके घर पहुंच गए और इसके कुछ देर बाद रेणु बाला गुप्ता के पति व भाजपा के जिला कोषाध्यक्ष बृज गुप्ता को करनाल जिले का कार्यकारी जिलाध्यक्ष घोषित करके प्रत्याशियों को जिताने की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी गई।
इससे करनाल सीट पर तो काफी हद तक डैमेज कंट्रोल कर लिया है लेकिन असंध सीट पर जब पूर्व विधायक पंंडित जिलेराम शर्मा ने टिकट कटने के तत्काल बाद ही बागी तेवर अपना लिए और अगले ही दिन अपने समर्थकों की बैठक बुलाकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया। उन्होंने मनाने का कोई मौका पार्टी को नहीं दिया लेकिन पूर्व विधायक बख्शीश सिंह ने कई दिन का मौका दिया। उन्होंने भी अपने समर्थकों की बैठक बुलाई थी लेकिन निर्दलीय नामांकन नहीं कराया। मानमनौव्वल के नाम पर असंध के भाजपा प्रत्याशी योगेंद्र राणा ही पहुंचे थे, जिन्हें साथ देने की बात कही लेकिन कोई बड़ा नेता उन्हें मनाने नहीं पहुंचा। बख्शीश सिंह विर्क 2014 में भाजपा के टिकट पर ही विधायक बने थे। वह लंबे समय से भाजपा से जुड़े थे।
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जजपा छोड़ यशकरण भी कांग्रेस में शामिल
करनाल। जननायक जनता पार्टी के जिला प्रवक्ता रहे यशकरण राणा भी मंगलवार को कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने भी दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष उदयभान की अगुवाई में कांग्रेस की सदस्यता ली है। जजपा के जिला प्रवक्ता यशकरण राणा काफी समय से संगठन के लिए कार्य कर रहे थे। पार्टी की कई बैठकें भी कराईं, लेकिन टिकट वितरण के बाद उनकी नाराजगी भी सामने आई थी। उन्होंने जजपा को छोड़ने का एलान तो तीन दिन पहले ही कर दिया था लेकिन अब उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता गृहण कर ली है। इसे भी जजपा के लिए झटका माना जा रहा है। जजपा-आसपा ने संयुक्त रूप से करनाल सीट पर जितेंद्र रॉयल को प्रत्याशी बनाकर चुनावी अखाड़े में उतारा है।