संवाद न्यूज एजेेंसी
करनाल। ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़कर सशक्त बन रही हैं। वह विभिन्न प्रकार के दुग्ध उत्पाद बनाकर आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। इंद्री निवासी जिंदर रानी ने 2015 में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बचत शुरू की जिसमें उन्होंने पहला डेढ़ लाख का लोन लेकर दो गाय खरीद कर दुग्ध उत्पादन का काम शुरू किया जिसमें पनीर, मक्खन, दही और घी जैसे खाद्य पदार्थों को बनाकर बेचना शुरू किया। उन्होंने शुरुआत केवल दो महिलाओं से की लेकिन बाद में 10 महिलाओं को समूह से जोड़ा जिसमें वर्तमान में सभी महिलाएं मिलकर आठ से 10 गाय व भैंस पाल कर स्वयं की डेयरी खोल कर काम कर रही हैं।
डेयरी में दूध से बने उत्पादों में पनीर, दही, मक्खन, घी, खोया, छाछ और कई प्रकार की मिठाइयां बनाई जाती हैं। समूह की सभी महिलाओं ने सबसे पहले समूह से जुड़ कर बचत करनी सिखी जिसमें हर महीने सौ-सौ रुपये की बचत की। इसके बाद समूह की सभी महिलाओं ने मिलकर पहला लोन डेढ़ लाख का, दूसरा लोन तीन लाख का और तीसरा लोन छह लाख का लोन लेकर लगभग 10-12 स्वयं की गाय-भैंस खरीद व दुकान खरीद कर काम शुरू किया। वर्तमान में हर महिला आठ से नौ हजार रुपये की कमाई कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
जिंदर रानी ने बताया कि वह समूह की कोषाध्यक्ष हैं, उन्होंने बताया कि 2017 में पहला लोन लेकर स्वयं के दो पशु खरीदे जिसके बाद धीरे-धीरे अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर उन्हें डेयरी का काम शुरू किया। अब तक लगभग 15 से 20 महिलाओं को पशुपालन और दुग्ध उत्पादन का प्रशिक्षण दे चुके हैं। जिसमें ग्रामीण महिलाएं अपने स्तर पर पशुपालन कर स्वयं के लिए बचत करने के साथ-साथ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति भी सुधार रही हैं। पहले के समय में ग्रामीण महिलाएं घर से बाहर तक नहीं निकल सकती थी लेकिन आज के दौर में अपने स्तर पर हर छोटे-मोटे कारोबार कर सशक्त हो रही हैं।