घरौंडा के बाद इंद्री क्षेत्र में भी अब डेंगू ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। अकेले गांव बड़ागांव में दर्जन भर से अधिक लोग डेंगू से पीड़ित हैं जबकि एक महिला समेत दो संदिग्ध डेंगू की चपेट में बताए गए हैं, जबकि महिला सहित दो की मौत हो चुकी है।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग डेंगू पर लगाम लगाने में लाचार नजर आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष नंदलाल पांचाल भी डेंगू की चपेट में है। गांव के लोगों में सरकार के प्रति गहरी नाराजगी है। गांव बड़ागांव का शायद ही ऐसा कोई घर बचा है, जिसमें कोई सदस्य बुखार से पीड़ित नहीं हो। गांव में संदिग्ध डेंगू से 45 वर्षीय सुरजा राम और 28 वर्षीय पिंकी की मौत हो चुकी है।
भाजपा के मंडल अध्यक्ष नंदलाल पांचाल, शीशपाल राणा, सत्या देवी, मोहर सिंह, जरनैल सिंह, दिशा सैनी, काला गुप्ता, सन्नी गुप्ता, गुरपाल, रोशनी, अनीता, मास्टर सेवा राम, गोपाल के अलावा काफी लोग डेंगू से पीड़ित हैं। पिछले एक महीने से यह क्रम चल रहा है, परंतु स्वास्थ्य विभाग के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। गांव के लोग डेंगू से इस कदर घबराए हुए हैं कि जिसे भी बुखार आता है, वह शहर की ओर रुख कर लेता है। परंतु स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते गांव के अधिकतर लोग झोलाछाप डॉक्टरों के चंगुल में फंसकर इलाज करवा रहे हैं।
मामला तब उजागर हुआ जब घर-घर चलो अभियान के तहत पूर्व विधायक राकेश कंबोज गांव का दौरा कर रहे थे। ग्रामीणों ने उनके सामने यह समस्या रखी। पूर्व विधायक ने अधिकारियों और मीडिया के सामने मामला उठाया। उनका कहना है कि विकास को छोड़कर इंद्री हलके के लोगों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ किया जा रहा है। कंबोज ने कहा कि मामले को प्रदेश स्तर पर उठाया जाएगा। डेंगू के कारण गांव के लोगों में भय का माहौल है।
नहीं हुई फॉगिंग
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मिलकर फॉगिंग कराने का आग्रह किया गया है। फॉगिंग कराना तो दूर, विभाग के डॉक्टरों ने गांव में आना भी मुनासिब नहीं समझा। सरपंच पूर्ण सिंह ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में पोल्ट्री अधिक संख्या में हैं। इसके चलते ये लोग मरे हुए मुर्गे और अंडे खुले में सड़कों पर फेंक देते हैं।
इससे गंदगी उत्पन्न होती है और गंदा पानी सड़क किनारे एकत्रित हो जाता है। इससे मच्छर उत्पन्न होते हैं। पोल्ट्री व्यवसाय से जुडे़ लोगों से भी बातचीत की गई थी, परंतु कोई हल नहीं निकला। पिछले एक सप्ताह से गांव की नालियों में दवाइयों का छिड़काव किया जा रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है। कई बार सीएमओ तथा अन्य अधिकारियों से मिलकर समस्या से अवगत कराया गया है। अधिकारियों से भी गुहार लगाई गई है।
साफ सफाई पर ध्यान दें लोग : सीएमओ
सिविल सर्जन डॉ. वंदना भाटिया ने बताया कि गांव बड़ागांव में डेंगू के चार मामले सामने आए हैं। इसके अलावा यहां मलेरिया का लारवा भी अधिक मिला है। गांव में गंदगी के कारण ऐसा हो रहा है। यह समस्या जगह-जगह जलभराव के कारण है।
इस संबंध में सरपंच और बीडीपीओ को जमा पानी निकलवाने की बात की थी। सीएमओ ने स्वीकार किया कि पूरे कुंजपुरा क्षेत्र में डेंगू की समस्या है। यहां तक की पीएचसी के समीप भी जलभराव के कारण समस्या आ रही है। स्वास्थ्य विभाग डेंगू और मलेरिया के प्रति गंभीर है। लगातार गांवों में जाकर जगह चिह्नित कर फॉगिंग कराई जाती है और दवाइयां वितरित की जाती है।
कत्लाहेड़ी में पूर्व विधायक को डेंगू
जुंडला में डेंगू का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। ग्रामीणों में इस बीमारी के फैलने से भय का माहौल बना हुआ है। लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति आक्रोश बढ़ रहा है। गांव कत्लाहेड़ी, जुंडला, बांसा, हथलाना सहित कई गांवों में डेंगू का प्रकोप फैल रहा है।
कत्लाहेड़ी में पूर्व विधायक रिसाल सिंह भी इस बुखार से पीड़ित चल रहे हैं। इसी गांव में बीमारी से एक व्यक्ति की मौत हो जाने का मामला भी सामने आया है। ग्रामीण धर्मपाल सिंह, सोनू, ईश्वर सिंह, कालू राम, रणबीर सिंह, हिसम सिंह, रामकुमार ने गांव में स्वास्थ्य विभाग से इस बीमारी से निपटने व बचाव के तुरंत कदम उठाए जाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि गांवों में तुरंत प्रभाव से फॉगिंग व दवाई का छिड़काव कराया जाए। जुंडला के उप स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारी डॉ. एसएस संधू का कहना है कि डेंगू खतरनाक बीमारी ही नहीं, बल्कि जानलेवा भी है। इससे ग्रामीणों को सावधान रहना चाहिए। नालियों में टेमीफॉस का स्प्रे करना चाहिए। रात के समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करना चाहिए। बुखार की शिकायत होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए।