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उत्पीड़न रोकने के लिए जागरूकता जरूरी : प्रो. रंजन

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करनाल। महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय (एमएचयू) के कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा के मार्गदर्शन में बुधवार को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। छात्र कल्याण निदेशक प्रो .रंजन गुप्ता ने कहा कि उत्पीड़ने रोकने में जागरूकता सबसे मजबूत उपकरण है।
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उन्होंने कहा कि कानूनी ढांचे और संस्थागत तंत्रों पर खुद को शिक्षित करके, हम व्यक्तियों को किसी भी तरह के कदाचार के खिलाफ खड़े होने के लिए सशक्त बनाते हैं। कुलपति डॉ. सुरेश मल्होत्रा के मार्गदर्शन में आयोजित विशेष कार्यशाला में एक सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण पर बल दिया गया। प्रो. रंजन ने कहा कि छात्रों और शिक्षकों को शैक्षणिक स्थानों में उत्पीडऩ को रोकने, पहचानने और संबोधित करने के ज्ञान से लैस करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कानूनी ढांचे के किसी भी तरह के शोषण को रोकने पर खुली चर्चा और सक्रिय उपायों के महत्व पर जोर दिया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की पूर्व अध्यक्ष प्रो. अनीता यादव ने कहा कि यौन उत्पीडऩ को रोकने और उससे निपटने के लिए हर संस्थान को आईसीसी के दिशा-निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए।
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यौन उत्पीड़न केवल शारीरिक दुर्व्यवहार नहीं है, बल्कि इसमें मौखिक, गैर-मौखिक और डिजिटल क्रियाएं भी शामिल हैं। उन्होंने आग्रह किया कि हर शिकायत को गोपनीयता, निष्पक्षता और सख्त कार्रवाई के साथ निपटाया जाना चाहिए, ताकि ऐसा परिसर सुनिश्चित हो सके जहां सुरक्षा और सम्मान पर कोई समझौता न किया जा सके। डीन प्रो. रमेश गोयल, डीन पीजीएस डॉ. धर्मपाल, संकाय सदस्य और छात्र शामिल हुए। कार्यशाला का समन्वय सहायक प्रो. डॉ. उमा प्रजापति ने किया।
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