हरियाणा सरकार द्वारा 15 फरवरी की देर शाम आशा वर्कर्स की हड़ताल पर एस्मा लगाने का आदेश जारी करने के बाद आशा वर्कर्स भड़क गई हैं। आशा वर्कर यूनियन की अध्यक्ष सुरेखा, महासचिव सुनीता व राज्य सचिव सुदेश रानी ने संयुक्त रूप से जारी एक बयान में इसे सरकार की दमनकारी नीति बताते हुए कहा है कि आशा वर्कर मामूली प्रोत्साहन राशि पर काम करने वाली स्वयंसेवी हैं, न कि सरकारी कर्मचारी। हरियाणा सरकार के इस रवैये को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आंदोलन किया जाएगा। 17 फरवरी को प्रदेश भर की आशा वर्कर अंबाला पहुंचेंगी और वहीं से आगामी रणनीति बनाकर निर्णय लिया जाएगा।
यूनियन नेताओं ने कहा कि मिशन निदेशक द्वारा जारी किए गए पत्र में 1974 के जिस कानून का हवाला दिया गया है, वह सरकारी कर्मचारियों के लिए है न कि स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं के लिए। सरकार का यह दमनकारी रवैया केवल आशा वर्कर को डरानेे, जायज मांगों के लिए उठाई जा रही आवाज को दबाने के लिए है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ हरियाणा के मुख्यमंत्री ने एनएचएम में काम करने वाले सभी कर्मचारियों के वेतन को सातवें वेतन आयोग से जोड़ने की घोषणा की है। आशा वर्कर भी एनएचएम का हिस्सा हैं जिसे मुख्यमंत्री ने अनदेखा किया है। 2018 के बाद आशा वर्कर के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है और इन चार वर्षों में महंगाई दोगुनी हो गई है। आशा के कार्य भी दोगुने हो गए हैं। इसलिए आश वर्कर्स की मांगे जायज हैं, सरकार को पूरा करना ही होगा।